तोता रटन्त से संस्कृत लोकभाषा नही बन सकती: कुलपति
संस्कृत सेवा ईश्वरीय कार्य : अध्यक्ष,

बिहार में भी हो संस्कृतग्राम का निर्माण : प्रो0 पांडेय

12 दिवसीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग का हुआ शुभारम्भ,

पूरे बिहार व झारखंड से आये हैं 126 प्रशिक्षणार्थी

विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में कार्यक्रम आयोजित

दरभंगा/संजय कुमार राय 

संस्कृत विश्वविद्यालय में 12 दिवसीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग की शुरुआत होने के अवसर पर गुरुवार को दरबार हॉल में बड़े ही धूम धाम से उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया ।

संस्कृत भारती बिहार न्यास एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में बिहार एवं झारखण्ड के प्रशिक्षु संस्कृत सीखने के लिए जुटे हैं। मुख्यालय के नए परीक्षा भवन में यह प्रशिक्षण वर्ग 17 जून तक चलेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष प्रो.इन्द्रनाथ झा ने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संस्कृत पढ़ने के लिए छात्रों को प्रेरित करना चाहिए । संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं के लिए संस्कृत सेवा ईश्वरीय कार्य है। ऐसा मानकर ही वे राष्ट्रहित में कार्य करते हैं।

संस्कृत भाषा जनभाषा व लोकभाषा के साथ साथ व्यवहारिक भाषा बने इसके लिए वे संकल्पित होते हैं। इस भावना को और दृढ़ करने की जरूरत है।
वहीं ,मुख्यातिथि केएसडीएसयू के कुलपति प्रो लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि आज से करीब चालीस वर्ष पूर्व चमूकृष्ण शास्त्री ने कुछ संस्कृत छात्रों के साथ इस संस्कृत संभाषण कार्य की शुरुआत की थी जिसका परिणाम आज देश और विदेशों ‌में दिख रहा है । डॉ भीमराव अम्बेडकर संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के पक्षधर थे। हमें संस्कृत शास्त्रों के संरक्षण के साथ साथ संस्कृत संभाषण के अभ्यास पर भी बल देना होगा । सम्भाषण शिविर की महत्ता को स्पष्ट करते हुए कुलपति प्रो0 पांडेय ने कहा कि भाषा शिक्षण सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। यदि संस्कृत संभाषण नहीं होंगे तो इसे लोग कैसे सुनेंगे और यदि सुनेंगे नहीं तो वे बोलेंगे कैसे। इसलिए इसकी व्यापकता के लिए संभाषण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना होगा ।

हाँ, तोता रटंत संस्कृत से संस्कृत व्यवहारिक भाषा नहीं बन सकती है । संस्कृत में सामर्थ्य है परंतु इसके लिए अभ्यास नहीं हो रहा है। इसलिए भी अभ्यास करने के लिए इस तरह के आवासीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया जाना आवश्यक है।
इसी तरह विशिष्ट अतिथि निवर्तमान कुलपति प्रो शशिनाथ झा ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम से संस्कृत वातावरण का निर्माण होता है। आज के प्रशिक्षणार्थी अपने दैनिक व्यवहार में संस्कृत को आत्मसात कर लोगों को संस्कृत संभाषण के लिए प्रेरित करें।

सम्मानित अतिथि पूर्व कुलपति राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित आरएसएस के जिला संघचालक प्रख्यात ज्योतिषी प्रो.रामचन्द्र झा ने कहा कि देश के संस्कृत विश्वविद्यालयों में शास्त्रों की पढ़ाई संस्कृत माध्यम से होने पर संस्कृत बोलचाल की भाषा आसानी से बनेगी। पूर्व में संस्कृत मिथिला की बोलचाल की भाषा थी । संस्कृत भारती 54 देशों में संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण कार्य चला रही है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिष्ठा संस्कृत एवं संस्कृति में निहित है। इस ओर सभी का ध्यान आवश्यक है।

सारस्वत अतिथि संस्कृत भारती बिहार के क्षेत्रमंत्री प्रो.श्रीप्रकाश पांडेय ने कहा कि संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं के परिश्रम से कर्नाटक, मध्यप्रदेश आदि प्रदेशों में संस्कृतग्राम का निर्माण हुआ है। बिहार में भी संस्कृतग्राम के निर्माण के लिए संस्कृत भारती कार्यकर्ताओं को अथक प्रयास करना होगा। उन्होंने भी सम्भाषण को जरूरी बताया।

संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ रमेश कुमार झा ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भाषा शिक्षण, व्यवहार शिक्षण व कौशल विकास इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने यह भी बताया कि व्यवस्था के लिहाज से कम प्रशिक्षुओं का पंजीयन किया गया है। अन्यथा संस्कृत सीखने के लिए और लोग तैयार थे।
उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकान्त ने बताया कि बिहार के 17 जिले से 101 तथा झारखंड के छह जिले से 25 यानी कुल 126 प्रतिभागी संस्कृत सीखने यहां पंजीकृत हुए हैं। इन्हें प्रतिदिन 17 जून तक संस्कृत में बोलने , लिखने -पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वहीं, कार्यक्रम के संरक्षक द्वय डीएसडब्ल्यू डॉ शिवलोचन झा तथा सीसीडीसी डॉ दिनेश झा की निगरानी में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था परीक्षा भवन व मनोरंजन गृह में की गई है। एनएसएस पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार झा तथा भू सम्पदा पदाधिकारी डॉ उमेश झा भी अपनी पूरी टीम के साथ इस कार्य मे सहयोग कर रहे हैं।
बता दें कि कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

 

अतिथियों का सम्मान डॉ दिनेश झा, डॉ घनश्याम मिश्र , डॉ दीनानाथ साह ,डॉ संजीत कुमार झा, डॉ त्रिलोक झा ने किया।
प्रान्त प्रचारक प्रमुख डॉ रामसेवक झा के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत भाषण शिक्षा शास्त्र विभाग के निदेशक डॉ घनश्याम मिश्र ने किया। रांची से आए कार्यक्रम शिक्षण प्रमुख डॉ चंद्रमाधव सिंह ने कार्यक्रम का बखूबी से संचालन किया और संस्कृत भारती दरभंगा के विभाग संयोजक डॉ त्रिलोक झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। डॉ वीरसनातन पूर्णेन्दु राय ने एकता मंत्र प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो.लक्ष्मीनाथ झा, प्रो. पुरेन्द्र वारिक, प्रो.रेणुका सिन्हा,प्रो.दयानाथ झा, डॉ विनय कुमार मिश्र ,दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय के निदेशक डॉ संदीप तिवारी,संस्कृत भारती के संगठन मंत्री श्रबण कुमार, मुजफ्फरपुर जिला संयोजक अखिलेश कुमार मिश्र, विस्तारक अंकुश कुमार,डॉ उमेश झा, डॉ महानंद ठाकुर, डॉ शंभुशरण तिवारी, डॉ अयोध्यानाथ झा उपस्थित थे।