मिथिलांचल में ए टु जेड की पार्टी या फिर माई-बाप समीकरण फेल,हालांकि बिहार के अन्य लोकसभा क्षेत्रों में इंडिया गठबंधन की बढ़त।प्रधानमंत्री पद के लिये लोंगों के दिलो में  एक दशक बाद भी सिर्फ मोदी।

दरभंगा /संजय कुमार राय

लोकतंत्र में मतदाता मालिक हें किसे सर पर चढ़ाएगी और किसे धूल चटायेगी ,यह कहा नहीं जा सकता। लोकसभा क्षेत्र दरभंगा समेत कई लोकसभा क्षेत्रों में यह देखने को मिला हें।
दरभंगा लोकसभा क्षेत्रों में बीजेपी उम्मीदवार गोपाल जी ठाकुर का विरोध चरम पर था।वें जहां और जिस गांव में चुनाव प्रचार के दौरान जाते थे वहां उन्हें लोंगों का विरोध झेलना पड़ता था लेकिन परिणाम कुछ और ही निकला। राजद प्रत्याशी ललित यादव जहां पहुंचते थे उनके साथ पहले से कुनबा रहता था और लोंगों की भीड़ भी होती थी लेकिन परिणाम सामने हें कि हार का सामना करना पड़ा।
दरअसल ललित यादव एम वाई समीकरण में तो फिट थे लेकिन ए टु जेड में कहीं से फिट नहीं बैठे। वजह वे एमवाई समीकरण में घिरकर रह गये। एम वाई समीकरण की भीड़ से आश्वासत हो गये थे कि जीत उनकी पक्की हें और औंधे गिर पड़े।
इसी तरह पूर्णियां में निर्दलीय प्रत्याशी पप्पू यादव अपनी रणनीति में कामयाब हो गये। पूर्णिया में उन्हें सभी जाति  के लोंगों ने समर्थन किया हें ,जब्कि  तेजस्वी बोल गये थे कि एनडीए प्रत्याशी जीत जाएं वह ठीक हें लेकिन पप्पू यादव नहीं जीतें इसके बावजूद पप्पू यादव ने पूर्णिया से जीत हासिल की।
वहीं काराकाट से “सुनअ हो बड़का भाई “का गाना तो सुर्खिया बटोरी लेकिन पवन सिंह चित्त  हो गये। भोजपुरी स्टार की भीड़ भी काम नहीं आया। वैसे सभी भोजपुरी स्टार पहली बार में हार ही चखा हें हार के बाद कई कलाकारों ने जीत हासिल की हें । इस भीड़ में मेनेजमेंट के कमी के कारण उन्हें हार देखना पड़ा। इसी तरह वैशाली सीट पर मुन्ना शुक्ला भी आश्वस्त दिखे लेकिन वीणा देवी के एक गर्जन ने कि मै भी भूमिहार हुं ,यह नारा शुक्ला जी को चारों नाल चित्त कर दिया।
जनता मालिक हें कब किसे क्या करेगी पता नहीं। कई राज्यों में एनडीए की तगड़ी मेनेजमेंट ने इंडिया गठबंधन को खाता नहीं खुलने दिया। जनता ने एक मुश्त वोट एनडीए को दिया। वहीं इंडिया गठबंधन ने वर्ष 2019के मुकाबले वर्ष 2024में बेहतर प्रदर्शन किया हें।