अगर कारवाई पुलिस ने की हें तो न्याय भी पुलिस को ही देना पड़ेगा ,न्याय के लिये डीआईजी एसएसपी ,एसपी से लगा रहें गुहार :अधिवक्ता सुशील चौधरी।

दरभंगा /

बहेड़ा थाना में दर्ज एक मामले की पेचीदा गुत्थी सलझ नहीं रही हें इसे लेकर पुलिसिया कार्यशैली पर प्रश्न उठना लाजमी हें।आखिर ऐसे में पीड़ित व्यक्ति न्याय की उम्मीद कैसे करें ?जब कोई पीड़ित व्यक्ति अपनी बेगुनाही को लेकर बार बार डीआईजी ,एसएसपी ,एसपी से न्याय की गुहार लगा रहा हो,और उसे न्याय नहीं मिलें ?

इसके बावजूद भी पीड़ित को भरोसा हें कि पुलिस से उसे  न्याय जरूर मिलेंगा।

जी हम बात कर रहें हें बहेड़ा थाना कांड संख्या 138/23के बारे में। इस कांड के अभियुक्त बेनीपुर बार एसोसियेशन के पूर्व महासचिव सुशील कुमार चौधरी बेगुनाह होते हुये पुलिस की गलत कार्यशैली के कारण जेल की हवा खाकर आ चुके हें और अपने नियमित काम यानि वकालत कर रहें हें। इनकी गलती बस इतनी थी कि इन्होंने कुछ लोंगों को बार एसोसियेशन के सदस्यता समाप्त कर दिया था , जिसे बिहार राज्य विधिज्ञ परिषद पटना ने संपुष्ट कर दिया। जिसका प्रतिफल यह हुआ कि एक झूठे मुकदमे में इन्हें जेल जाना पड़ा।
इस कांड में मजेदार पहलू यह हें कि 26मार्च 23को प्राथमिकी दर्ज किया गया था और 27मार्च 2023को पुलिस ने इन्हें पकड़कर जेल भेंज दिया। पुलिस की तत्परता देख स्थानीय लोंगों समेत दरभंगा सहित बहेड़ा के वकालत खाना में चर्चा का विषय बना था। चर्चा यही था कि वकील श्री चौधरी बलात्कारी नहीं था ,हत्यारा भी नहीं था और अपराधी भी नहीं था फिर गिरफ्तारी में पुलिस ने इतनी जल्दबाजी क्यू दिखाई ?कई वकील तो यह भी कह रहें हें कि पहले श्री चौधरी की गिरफ्तारी हुई बाद में एक दिन पहले के तिथि में प्राथमिकी दर्ज की गई,जब्कि पर्यवेक्षण के बाद गिरफ्तारी की जाती तो न्यायसंगत बात होती, पर पुलिस ने ऐसा नहीं किया था।इस प्राथमिकी दर्ज करने /कराने में दिलचस्प पहलू यह भी हें कि दो दिनों तक अधिवक्ता सुशील चौधरी पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ ,इस ड्रामे एक थानेदार ने कहा कि झूठा प्राथमिकी दर्ज नहीं करेंगे तो उसे हटाकर पुलिस लाइन क्लोज कर नये थानेदार को बहेड़ा थाना भेजा गया ,उस थानेदार को कहा गया कि प्राथमिकी दर्ज करो ,वह थानेदार आनन फानन में थाना नहीं जाकर छुट्टी पर चला गया फिर एक एसआई को प्रभार देकर अधिवक्ता श्री चौधरी पर प्राथमिकी दर्ज कराई गयी ॥बताया जाता हें कि तात्कालीन एसएसपी के निर्देश पर यह कारवाई की गई थी ?

जेल से बाहर आने के बाद कई बार वकील श्री चौधरी तात्कालीन आईजी ,वर्तमान डीआईजी को पत्र देकर इस बिंदु पर जांच कर न्याय देने की गुहार लगा चुके हें लेकिन उनके द्वारा दिये आवेदन पर पुलिस की जांच या कोई भी कारवाई नदारद हें बस कागजी घोड़ा दौड़ रहा हें ?
हाल के दिनों में एसएसपी ने 05मार्च 24को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बेनीपुर को निर्देश देते हुये कहा था कि इस मामले में विधि सम्मत कारवाई करते हुये कृत कारवाई से संबंधित प्रतिवेदन एक सप्ताह के भीतर इस कार्यालय में उपलब्ध कराये ?
दरअसल वकील श्री चौधरी ने डीआईजी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि निष्पक्ष पदाधिकारी से जांच कराकर उचित न्याय देने की कृपा प्रदान करें इसी आलोक में एसएसपी ने एसडीपीओ बेनीपुर को पत्र लिखा था। बेनीपुर एसडीपीओ ने इस पत्र के आलोक में 17मार्च 24को थानाध्यक्ष बहेड़ा को पत्र के माध्यम से अवगत जरूर कराया लेकिन वह पत्र बहेड़ा थाना तक नहीं पहुंचा ,सूत्रों का कहना हें कि यह पत्र एसडीपीओ के फ़ाइल तक ही सीमित रह गया।
वकील श्री चौधरी ने पुनः डीआईजी एवं एसएसपी को सभी बातों से अवगत कराते हुये कहा कि सर ,अपने स्तर से इस मामले की समीक्षा करा ली जाय ताकि मुझे न्याय मिल सके। वकील श्री चौधरी ने कहा कि इस मामले को लेकर उन्होंने ग्रामीण एसपी से भी गुहार लगाया हें। अब उन्हें इंतजार हें कि इस कांड की समीक्षा वरीय पुलिस पदाधिकारी कब करते हें ?
इतना तो तय हें कि इस कांड की समीक्षा की जाय तो वकील श्री चौधरी को न्याय मिल सकता हें ?इस कांड के अनुसंधान और पर्यवेक्षण में कई ऐसी त्रुटियाँ हें जो समीक्षा के उपरांत ही सच्चाई खुलकर सामने आयेगी।

तात्कालीन एसडीपीओ ने अपने पर्यवेक्षण टिप्पणी में अनुसंधानकर्ता को जिन नौ बिंदुओं पर निर्देश दिये हें वह हास्यास्पद हें। यह बात घटनास्थल पर जानें से सच्चाई खुद व खुद सामने आ जाएगी। दर्ज किये गये प्राथमिकी के साक्ष्य में ना ही पुलिस के पास कोई विडिओ हें ना ही कोइ सीसीटीवी फुटेज हें ,ना ही वकील सुशील का कोई आपराधिक इतिहास हें ,ना ही न्यायालय के सीसीटीवी कैमरे में घटना से संबंधित कोई फुटेज हें ,हाँ टावर लोकेशन मिल सकता हें क्यूंकि एक ही परिसर में सभी काम करते हें।एसडीपीओ द्वारा दिये गये अनुसंधान के निर्देश में अनुसंधानकर्ता को अब तक कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलें हें ऐसे में सवाल यही हें कि आखिर पुलिस ने इतनी जल्दबाजी श्री चौधरी के गिरफ्तारी में क्यू दिखाई ?इस पूरे मामले की सच्चाई समीक्षा के बाद ही सामने आ सकती हें।