बिहार राज्य खाद्य निगम लिखा चावल से भरे ट्रक पर क्या प्राथमिकी दर्ज होगी ?शहरी क्षेत्र के आपूर्ति पदाधिकारी ने कहा ,जांच के बाद ही होगी कोई कारवाई ?मामले को रफा दफा करने की कहीं कोशिश तो नहीं।

दरभंगा /संजय कुमार राय

एसएसपी के निर्देश पर बीती रात लहेरियासराय थाने की पुलिस ने बिहार राज्य खाद्य निगम लिखा चावल से भरा ट्रक(BR24 GC-3722) जब्त किया हैं जिसपर करीब बीस टन चावल लदा हुआ हैं। शंका हैं कि उक्त ट्रक पर लदा अनाज बिहार राज्य खाद्य निगम का ही हैं। वहीं चालक को हिरासत मे लें लिया गया हैं।


इस मामले मे लहेरियासराय थाना अध्यक्ष दीपक कुमार ने शहरी क्षेत्र के एवं सदर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी राजेश कुमार को जानकारी देने के बाद गुरुवार की दोपहर सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी के के मंडल एवं शहरी क्षेत्र के आपूर्ति पदाधिकारी राजेश कुमार मौके पर पहुंचकर ट्रक चालक से पूछताछ की एवं ट्रक पर लदे चावल के बोरे से चावल का सेम्पल निकाला जिसे जांच कर यह सत्यापित किया जाएगा कि यह सरकारी योजना का खाद्यान हैं अथवा नहीं। सभी चावल बाजार के बोरे मे पैक हैं । आपूर्ति पदाधिकारी राजेश ने कहा कि कुल बीस टन के करीब चावल हैं जिसकी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले मे लिखित शिकायत उनके द्वारा सदर अनुमंडलाधिकारी को किया जा रहा हैं। सदर अनुमंडलाधिकारी के आदेश पर आगे की कारवाई की जाएगी।


दरअसल पुलिस के कब्जे मे ट्रक से चावल निकाला गया तो देखने से प्रतीत होता हैं कि यह वहीं चावल हैं जिसे डीलरों द्वारा गरीब उपभोक्ताओ को दिया जाता हैं।
यहां बता दे कि इस योजना मे बड़ा -खेल बेल हैं। इस धंधे मे संलिप्त संवेदक की पहुंच भी ऊपर तक होती हैं वजह पैसों का अवैध लेन देंन हैं ?और पूरा सिस्टम इसकी चपेट मे हैं।सूत्र पूरा विस्तार से जानकारी देते हुये बताते हैं कि दरअसल गरीबों को मिलने वाला यह चावल खासकर शहरी क्षेत्रों मे गरीब लोग चावल को नहीं खरीदकर इसे बेच देते हैं। सूत्रों का कहना हैं कि डीलर 14रुपये किलो के दर से चावल नहीं खरीदने वाले उपभोक्ता को पैसा दे देता हैं। अब डीलर के संपर्क मे बेठा हुआ माफिया उसे 16रुपये का भाव देकर खरीद लेता हैं। इस दौरान सरकारी बोरी से पलटकर प्राईवेट बोरी मे अनाज का भंडारण करता हैं फिर यह चावल से भरा बोरी राज्य के प्रमुख संवेदक के पास जाता हैं और बताया जाता हैं कि वह प्रमुख संवेदक इस माफिया से  20-22रुपये की दर से खरीद लेता हैं। फिर यह प्रमुख संवेदक सरकार को 30या 32रुपये किलो के भाव से बेच देता हैं। फिर एफसीआई मे यह चावल सरकारी बोरी मे पैक होकर पुनः राज्य के कई जिलो के सरकारी गुदाम मे चला जाता हैं। फिर यहां से स्थानीय डीलर के पास पहुंच जाता हैं। और यह खेल लगातार चालू रहता हैं। इस कारण पूरे राज्य मे खेल चलता रहता हैं और सरकार को कई करोड़ रुपये का चुना लगता रहता हैं। इस खेल मे प्रखंड स्तर से लेकर जिला एवं राज्य के सभी जुड़े पदाधिकारियो को मासिक नजराना पहुंचता हैं।इसी बीच किसी सूचना पर  जब यह ट्रक पुलिस पकड़ती हैं तो पुलिस कुछ करती नहीं हैं ?बस प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी या संबंधित पदाधिकारी को सूचना दे देती हैं।इसके बाद फिर  प्रखंड ,जिला स्तर के पदाधिकारी इस मामले मे बड़ा खेल कर जाते हैं और कहते हैं यह तो किसान से खरीदकर लाया हैं। अगर उसी वक्त किसानों का नाम पूछकर जांच की जाय तो पूरा मामला आईने की तरह सामने आ जाएगा। पर ऐसा होता नहीं हैं। कागजों का खेल शुरू होता हैं और कागजों पर ही सारा मामला निपट जाता हैं।


इसी कारण जिला मे कई राईस मिलें बंद हो गई। उत्पादन क्षमता कई चावल मिलो का दस टन था  लेकिन प्रत्येक दिन सौ टन इन मिलों से चावल निकल जाता था।इसी तरह सभी मिल मालिक भी खेला करते थे लेकिन सरकार की नींद खुली और जब ऐसे मिल मालिको का अवलोकन आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई करने लगी तो कई करोड़ों का घोटाला सामने आया और ऐसी सारी मिलें आज के दिनों मे बंद हैं।

अब सवाल यही हैं कि बिहार राज्य खाद्य निगम लिखे ट्रक पर सरकारी अनाज के अलावे कैसे प्राईवेट अनाज ट्रक पर लोड हो सकता हैं।
दूसरा अहम प्रश्न यह हैं कि सरकार के नियमानुसार सभी ट्रको मे जीपीएस लगे होते हैं जिससे पता चलता हैं कि ट्रक सरकारी गोदाम से कहां कहां गई हैं ?और यह बात गोदाम प्रबंधक को पता रहता हैं। लेकिन इस आड़ मे बड़ा खेल होता हैं और सरकार को लाखों रुपये का चुना लगता हैं। ऐसे मामलों मे थानाध्यक्ष को प्राथमिकी करना चाहिये और अनुसंधान करना चाहिये लेकिन इस मामले मे सरकार का नियम बाधक हो जाता हैं और वहीं पदाधिकारी जांच मे जुटते हैं जो पहले से खुद इस गोरखधंधे मे संलिप्त हैं इस कारण मामला रफा दफा हो जाता हैं। अब फिर सवाल यही हैं कि पुलिस के पकड़ मे आई ट्रक के मामले मे क्या प्राथमिकी दर्ज होगी ?आपूर्ति पदाधिकारी राजेश का कहना हैं कि सदर एसडीओ के आदेश के बाद ही आगे की कारवाई होगी।