बेनीपुर के तात्कालीन एसडीपीओ के पर्यवेक्षण टिप्पणी पर उठ रहें सवाल ?पीड़ित अधिवक्ता ने डीआईजी से लगाया गुहार।

दरभंगा /

बेनीपुर के तात्कालीन एसडीपीओ के पर्यवेक्षण रिपोर्ट पर प्रश्नचिन्ह लगना शुरू हो गया हैं।बहेड़ा थाना कांड के दो मामलों को लेकर यह सवाल बेनीपुर बार एसोसियेशन के पूर्व महासचिव सुशील कुमार चौधरी ने उठाया हैं। इस दोनों मामले को लेकर अधिवक्ता सुशील ने मिथिला प्रक्षेत्र के आईजी ,दरभंगा एसएसपी को पत्र देते हुये न्याय की गुहार लगाया हैं।
दिये पत्र मे सुशील ने कहा हैं कि बहेड़ा थाना मे उनके विरुद्ध एक मामला 138/23 दर्ज किया गया  था जिसमें बेनीपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के गलत कार्यशैली को लेकर उन्हें जेल जाना पड़ा था। उन्होंने मिथिला प्रक्षेत्र के डीआईजी को दिये पत्र मे कहा हैं कि वह मुकदमा उनके ऊपर फर्जी तरीके से कराया गया था ,उन्होंने कहा कि पहले गिरफ्तारी हुई फिर थाने मे एक दिन पहले के तिथि मे मुकदमा दर्ज हुआ था ,पुलिस की यह कार्यशैली कहीं से उचित नहीं था।

उन्होंने कहा कि 5फरवरी 24को उनके साथ मारपीट करने आयें लोग उनके साथ साथ उनके महिला सहयोगी अधिवक्ता के साथ मारपीट की  ,गाली गलौज किया गया ,जाती सूचक शब्द का इस्तेमाल किया  जिसे लेकर बहेड़ा थाना मे मामला 31/24दर्ज किया गया।
अधिवक्ता सुशील चौधरी का आरोप हैं कि इस मामले के आरोपी को बचाने के लिये तात्कालीन पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी सुमित कुमार द्वारा निकाला गया पर्यवेक्षण रिपोर्ट सरासर गलत हैं।
इस मामले मे जिन लोंगों की गवाही लेकर एसडीपीओ ने मामले के धाराओं से खिलवाड़ किया हैं और कई गंभीर धाराओं को मामले से हटा दिया हैं यह उनके पर्यवेक्षण टिप्पणी पर सवाल खड़ा करता हैं?दरअसल मे ऐसे गवाहों से एसडीपीओ ने गवाही ही नहीं ली । इस मामले मे गवाह नुनु झा ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण )को पत्र के माध्यम से अवगत कराया हैं कि मेरा बिना बयांन लिये मेरा नाम पर्यवेक्षण मे स्वतंत्र साक्षी के रूप मे अंकित किया जाना  सरासर गलत हैं।
अधिवक्ता सुशील का आरोप हैं कि घटना के दिन का पुलिस को सीसीटीवी का फुटेज निकालना चाहिये था ,टावर लोकेशन निकालना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। अधिवक्ता सुशील चौधरी ने कहा कि कांड संख्या 138/23के जो साजिशकर्ता थे वहीं लोंगों ने उनके एवं उनके सहयोगियों के साथ मारपीट किया था।

उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर एसडीपीओ सुमित कुमार से बार -बार मिलकर आग्रह किये थे थे कि मामले की सत्यता की जांच कर दोषियों पर कारवाई करें लेकिन उन्होंने महज कुछ चंद पैसों की खातिर यहां से स्थानांतरित होते ही मामले को ही रफा दफा कर दिया ,जो न्यायसंगत नहीं हैं।
अधिवक्ता सुशील चौधरी का कहना हैं कि उन्हें उम्मीद हैं कि पुलिस हर बिंदु पर जांच करेगी और न्याय मिलेगा।