कुशेश्वरस्थान के दियारा में क्या AK-47 का मुकाबला करेगी रायफल ?महादलित परिवार की सुरक्षा मे लगाये गये हैं होमगार्ड के जवान।
कुशेश्वरस्थान के दियारा में क्या AK-47 का मुकाबला करेगी रायफल ?महादलित परिवार की सुरक्षा मे लगाये गये हैं होमगार्ड के जवान।
कुशेश्वरस्थान के दियारा में क्या AK-47 का मुकाबला करेगी रायफल ?महादलित परिवार की सुरक्षा मे लगाये गये हैं होमगार्ड के जवान।
कुशेश्वरस्थान /प्रशांत कुमार
कुशेश्वरस्थान पूर्वी का दियारा क्षेत्र वर्षों से अपराधियों का शरण स्थली रहा हैं। इस इलाके मे आज के दिनों मे भी अपराधियों की तूती बोलती हैं। दरभंगा से सटे सहरसा -खगड़िया -का सीमावर्ती इलाका अक्सर गोलियों की आवाज से गूंजता हैं।
जी हां आप सही सुन रहे है। कुशेश्वरस्थान दियारा में वर्षो से अपराधियों का वर्चस्व रहा है। यहां हर अपराधी के पास एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियार है पर इन आधुनिक हथियार वाले अपराधियों से लड़ने के लिए तिलकेश्वर पुलिस ने रायफल वाले 7 होमगार्ड के जवानों को बुढ़िया सुखरासी विद्यालय पर कैंप करने के लिए भेज दिया है,लेकिन यें होमगार्ड के जवान कब तक सुरक्षित हैं यह उन जवानों के हौसले पर हैं। अगर इन जवानों के हौसलों मे थोड़ी भी कमी देखी गई तो बड़ा हादसा हो सकता हैं ,कहा जा सकता हैं कि फिर इन जवानों से रायफल जैसी लूट की बड़ी वारदात हो सकती हैं। ऐसे मे तिल्केश्वर थाना की पुलिस को सजग होकर रहना पर सकता हैं।
सवाल तो यह भी हैं कि कब तक पुलिस इन महादलित परिवारों को सुरक्षा देगी ,उन्हें खुद भी इन अपराधियों से निपटने के लिये आत्मनिर्भर होना पड़ेगा ?
सवाल तो यह भी हैं कि क्या ये होमगार्ड के जवान अपने सरकारी रायफल से अपराधियो के अंक 47 का मुकाबला कर पाएगी ।
यहां बता देना जरूरी हैं कि दियारा क्षेत्र में काजल यादव हत्या के बाद साधु यादव अपना वर्चस्व बनाने के लिए कई घटनाओं को अंजाम दिया हैं, इसके बाद से ही साधु यादव का डर लोगो को सताने लगा हैं । हथियार के बल पर लोगो का फसल काट लेना, बहु बेटियों की इज्ज़त के साथ खेलना ऐसे अपराधियों के लिए कोई बड़ी बात नही हैं ।
अपराधियों के डर से पलायन किये थे सभी महादलित परिवार ,बेंकों के कर्ज के डर से नहीं ?
अपराधियों के डर से यहां के दर्जनों महादलित परिवार पलायन कर गये। पलायन की खबर विभिन्न अखबारों में प्रकाशित होने के बाद स्थानीय प्रशासन की नींद खुली जिसके बाद एसडीपीओ मनीष चंद्र चौधरी के नेतृत्व में कई थाने की पुलिस दियारा के बुढ़िया सुखरासी गांव पहुंचे थे।
तिल्केश्वर पुलिस ने एसडीपीओ को किया था गुमराह।
मजेदार बात यह हैं कि तिल्केश्वर थानाध्यक्ष ने एसडीपीओ बिरौल को यहां की वास्तविक सच्चाई से अवगत नहीं कराया। तिलकेश्वर थानाध्यक्ष ने एसडीपीओ की टीम को पीड़ित लोगों के पास जानें तक नहीं दिया था ,चर्चा हैं कि अपने संपर्क के लोगो से तिल्केश्वर पुलिस ने एसडीपीओ से बात कराया। उन लोगो ने बिरौल के एसडीपीओ को बताया कि प्राइवेट बैंक के लोन अदा नही करने के कारण लोग पलायन कर रहे है,जब्कि सच्चाई कुछ और निकला। दर्जनों महादलित परिवार गांव से पलायन के करीब एक माह बाद एसएसपी ,डीआईजी कार्यालय पहुंचकर अपनी सच्चाई बताई और कहा कि अपराधियों के डर से हम लोग गांव से पलायन किये थे ना कि बेंक के कर्ज से।
एसएसपी का कदम सराहनीय
एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने मामले को गंभीरता से लेते हुये पुलिस की सुरक्षा मे सभी पीड़ितों को गांव तक छोड़ने और सुरक्षा देने का निर्देश दिया।
इस आलोक मे सभी पीड़ित परिवार को तिल्केश्वर थाना पर लाया गया। सभी पीड़ित परिवार के लोग उस दिन तिल्केश्वर थाना पर रात गुजारा ,वहीं दूसरे दिन पुलिस ने सभी पीड़ित परिवार को उसके घर तक छोड़ा ,और इसी गांव के स्कूल पर फिलहाल होमगार्ड के जवान केम्प कर रही हैं।
होमगार्ड की तैनाती पर्याप्त नहीं ?
लेकिन इस दियारा इलाके मे होमगार्ड की तैनाती पर्याप्त नहीं हैं ,चर्चित अपराधकर्मी साधु यादव के कई गुर्गे आज भी सक्रिय हैं। राहत की बात बस इतनी हैं कि सुभाष यादव फिलहाल जेल मे बंद हैं।आशंका बस यही हैं कि होमगार्ड के जवान सचेत नहीं रहें तो कोई बड़ी घटना भी हो सकती हैं यहां तक कि हथियार जैसी लूट के बड़ी वारदात को अंजाम यें अपराधी दे सकता हैं।