अवैध पिस्टल से गोली मारने एवं जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने सहित गाली गलौज करने के मामले मे अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास एवं 26हजार अर्थदंड की सुनाई सजा।
अवैध पिस्टल से गोली मारने एवं जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने सहित गाली गलौज करने के मामले मे अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास एवं 26हजार अर्थदंड की सुनाई सजा।
अवैध पिस्टल से गोली मारने एवं जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने सहित गाली गलौज करने के मामले मे अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास एवं 26हजार अर्थदंड की सुनाई सजा।
दरभंगा /विधि संवाददाता
दरभंगा सिविल कोर्ट के अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र कुमार की कोर्ट ने शुक्रवार को अलीनगर थानाक्षेत्र के अलीनगर निवासी जहीर अंसारी के पुत्र मो. गुफरान अंसारी उर्फ जिबरान को आजीवन सश्रम कारावास और 26 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। जूर्मी सजायाफ्ता ने अपने ही गांव के कामेश्वर महतो को अनुसूचित जाति का समझकर जानलेवा हमला किया , अवैध पिस्टल से गोली मारकर घायल कर दिया , जाति के नाम पर गालियाँ दिया था।एकल जूर्मी को गत 18 मई 24 को दोषी करार दिया गया था। अदालत ने दोषी अभियुक्त को सजा अवधि निर्धारण के बिन्दु पर सूनवाई और निर्णय के लिए 24 मई की तिथि निर्धारित किया। फलतः शुक्रवार को उभय पक्ष की ओर से बहसोपरान्त आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। स्पेशल पीपी संजीव कुमार कुंवर ने बताया कि 18 मई 23 की रात्रि में अभियुक्त ने अपने हीं गांव के कामेश्वर महतो के घर नीरा पीने के लिए गया।महतो ने कहा कि दुकान बंद हो गया है नीरा नहीं मिलेगा।इसी से आक्रोशित होकर जीवरान ने कामेश्वर महतो को अनुसूचित जाति का ब्यक्ति समझकर अपने कमर से पिस्टल निकालकर गोली मार दिया।जख्मी का इलाज डी एम सी एच के बाद स्थानीय एक निजी अस्पताल पारस में हुआ।जख्मी महतो के फर्दबयान पर अलीनगर थानाकांड सं.50/23 दर्ज हुआ।अनुसंधानक ने घटना के तीन दिन बाद अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और 13 जूलाई 23 को न्यायालय में आरोपपत्र समर्पित कर दिया ।स्पेशल पी पी श्री कुंवर ने बताया कि इस मामले को स्पीडी ट्रायल के तहत आठ गवाहों की गवाही कराई गई। न्यायालय में अभियुक्त के बिरुद्ध अपराध सिद्ध करने में सबसे अहम भुमिका एफ एस एल जांच प्रतिवेदन का रहा।जिससे यह साबित हुआ कि जप्त पिस्टल से चली गोली हीं जख्मी के शरीर में पाया गया था।जबकि जख्मी सूचक ने कोर्ट में सुलहनामा भी दाखिल किया था। अदालत ने शुक्रवार को दोषी करार दिए गए अभियुक्त के सजा अवधि के बिन्दु पर सुनवाई पूरी कर अभियुक्त को भादवि की धारा 307 में 10 वर्ष की सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अर्थदण्ड भुगतान नहीं करने पर तीन माह की सजा भुगतने का प्रावधान किया है। आर्म्स ऐक्ट की धारा 25(¡-b)a,में 2 वर्ष की कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अर्थदण्ड नहीं भुगतान करने पर 1 माह का किरावास की सजा भुगतने का प्रावधान किया गया है। 27 आर्म्स एक्ट में 3 वर्ष की कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अर्थदण्ड नहीं भुगतान करने पर 3 माह की सजा भुगतने का प्रावधान किया गया है। वहीं एससी/एसटी की धारा 3(2) v में आजीवन सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। अर्थदण्ड भुगतान नहीं करने पर तीन माह की सजा भुगतने का प्रावधान किया गया है। स्पेशल पी पी संजीव कुमार कुंवर ने बताया कि सभी सजायें साथ-साथ चलेगी।