कौन हैं साधू यादव ?जिसके गोलियों की आवाज से आज भी गूंजता हैं दरभंगा -खगड़िया -सहरसा का सीमावर्ती इलाका।फसल के लूट समेत बहू -बेटियों के इज्जत से भी की जाती हैं खिलवाड़।बाल -बच्चे समेत डर से भाग गये थे कई दर्जन महादलित परिवार।

दरभंगा /संजय कुमार राय/प्रशांत कुमार 

बिहार मे फिर से साधु यादव की चर्चाएं जोरों पर हैं ,करीब ढाई  दशक पहले साधु यादव का नाम सुन लोंगों के पसीने छूट जाते थे अब दो दशक बाद फिर एक साधु यादव का नाम सामने आ रहा हैं जिनकी चर्चाएं दरभंगा -खगड़िया -सहरसा के सीमावर्ती क्षेत्रों मे खूब हो रही हैं। इनके नाम के डर का खौफ इतना कि अच्छे अच्छे का पसीना छूट जाता हैं फिलहाल कुछ दिनों पहले सहरसा पुलिस ने इनके गुर्गे सुभाष यादव को  गिरफ्तार किया था और यें  जेल की हवा खा रहें हैं हालांकि इनके कई गुर्गे आज भी आतंक के पर्याय हैं।

दरभंगा -सहरसा -खगड़िया सीमावर्ती क्षेत्र के बुढ़िया-सुकरासी गांव का मामला

जी हम बात कर रहें हैं दरभंगा जिला के तिल्केश्वर थाना क्षेत्र के बुढ़िया शुकरासी गांव के उन ढाई दर्जन महादलित परिवारों के बारे मे , जो करीब एक महीने से ज्यादा दिनों से गांव को छोड़कर फरार थे ,पुलिस कह रही थी बेंक के कर्जे के डर से या फिर  अपने रोजगार की तालाश मे यें सभी गांव छोड़कर पलायन कर गये थे लेकिन बुधवार को यह सच्चाई सबके सामने आ गई। इस गांव के करीब ढाई दर्जन लोग अपने बाल बच्चों के साथ एसएसपी कार्यालय एवं डीआईजी कार्यालय पहुंचकर अपनी सच्चाई बताई। इस दौरान कई मीडिया कर्मी भी पहुंच गये। देर शाम तक आईजी कार्यालय के सामने सभी बैठे रहें।  एसएसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ अमित कुमार वहां पहुंचे और सभी पीड़ित परिवार से रूबरू हुये।इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि पुलिस की सुरक्षा  मे सभी पीड़ित परिवारों को उनके गांव भेजा जा रहा हैं और सभी लोग  पुलिस की निगरानी मे रहेंगे।

महादलित परिवार के कई पीड़ितों ने जिला के वरीय पुलिस आधिकारियों को पत्र देकर लगाई सुरक्षा की गुहार 

हालांकि महादलित परिवार के इन दलितों ने जो आवेदन पुलिस को दिया हैं वह चौंकाने वाला हैं ,ऐसा लगता हैं कि सुशासन की सरकार मे भी ऐसे बदमाश फल फूल रहें हैं,या फिर वहीं जंगल राज लौट आया हैं ?

अपराधियों ने गांव छोड़ने पर किया मजबूर 

कुशेश्वरस्थान पूर्वी के सभी पीड़ितों ने खुलासा किया हैं कि वे लोग बेंक ऋण के डर से या रोजगार की तालाश को लेकर पलायन नहीं किये थे बल्कि कई आपराधिक लोग उन्हें गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद सभी दर -दर की ठोकरें खा रहें हैं।

साधु यादव गिरोह का आतंक का पर्याय 

महादलित समुदाय के पीड़ित लोग जो जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारियों को पत्र से अवगत कराया हैं उसमें सहरसा जिला के महिषी थाना अंतर्गत कनौज गांव के सतो यादव के पुत्र साधु यादव ,इसी जिला के बक्तियारपुर थाना क्षेत्र के सूखासनी गांव निवासी सुभाष यादव ,महिषी थाना क्षेत्र के धनौजा गांव निवासी काजल यादव के पुत्र पिन्टेश यादव ,ग्राम घोघसन के राजेंद्र यादव के पुत्र अमरजीत यादव ,त्रिवेणी यादव का पुत्र राधे यादव ,तिल्केश्वर थाना क्षेत्र के गैजोड़ी गांव निवासी जय कान्त यादव के पुत्र अर्जुन यादव ,बूढियाँ गांव के मधुकर सदा के पुत्र दीपों सदा समेत कई अन्य हैं।
पीड़ित लोंगों मे शंकर सदा ,शिवजी सदा ,चंदर सदा ,नागों सदा ,दुलार सदा ,विपिन सदा ,केदार सदा ,सुधीर सदा ,दिनेश सदा ,संतोष सदा आदि कहते हैं कि साधु यादव के सदस्य 50-60की संख्या मे गांव मे आते हैं और AK47की गोलियां तरतराकर दहशत फैला देते हैं फिर मारपीट करते हैं ,महिलाओं के साथ बलात्कार कर पलायन करने पर मजबूर कर देते हैं।

हालांकि सहरसा पुलिस कुछ दिन पहले सुभाष  यादव को AK47के साथ गिरफ्तार किया था लेकिन चार -पांच दर्जन गुर्गे अभी भी दहशत फैला रहें हैं। डरे -सहमे इन महादलितों का कहना हैं कि कुछ दिन पहले आलू और गेहूं का फसल लूटकर साधु यादव एवं उसके गुर्गे लूटकर चले गये थे अब मकई का फसल लगा हुआ हैं और इन लोंगों के डर से हमलोग गांव नहीं जा रहें हैं। इन सबो का कहना हैं कि बिना सुरक्षा के गांव जाना खतरे से खाली नहीं हैं।

एसएसपी का सराहनीय कदम ,पुलिस की सुरक्षा मे पीड़ित परिवारों को भेजा गांव ,बिरौल डीएसपी को निगरानी का जिम्मा।

हालांकि दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने मामले को गंभीरता से लेकर पुलिस की सुरक्षा मे सभी को गांव भेजवा दिया हैं। एसएसपी श्री रेड्डी ने बिरौल के एसडीपीओ को इन महादलित परिवार की सुरक्षा को लेकर कई निर्देश दिये हैं।

करीब डेढ़ दशक पहले भी माओवादियो द्वारा अक्सर की जाती थी आपराधिक वारदातें ,पुलिस ने तोड़ दी थी कमर।

करीब 12-13साल पहले इसी सीमावर्ती इलाकों मे माओबादियो ने कई घर लूटा ,कई ग्रामीण महिलाओं के इज्जत के साथ खिलवाड़ किया था। एक डीलर और एक मुखिया का अपहरण किया था उस वक्त दरभंगा के एसएसपी एम आर नायक थे वहीं मिथिला प्रक्षेत्र के आईजी प्रवीण वशिष्ठ थे। प्रवीण वशिष्ठ ने दरभंगा ,समस्तीपुर ,खगड़िया ,सहरसा आदि के एसपी के साथ बैठक कर एक टीम बनाया था जिसका नेतृत्व बिरौल के डीएसपी अंजनी सिंह कर रहें थे। कई दिनों तक चारों जिला की पुलिस दियारा क्षेत्र मे चहल कदमी बढ़ाते हुये पूरे क्षेत्र को ही घेर लिया था । कई माओवादी हथियार के साथ पकड़े गये थे। पुलिसिंग इतनी बेहतर हुई थी कि इसके बाद अबतक यह इलाका शांत था लेकिन इस प्रकरण के बाद ऐसा लग रहा हैं कि साधु यादव समेत उनके गुर्गे फिर वहीं आतातायी मे जुट गये हैं जिस तरह माओवादी किया करते थे। उस वक्त भी यह इलाका गोलियों के तरतराहट से गूंज उठता था। करीब एक दशक बाद फिर यही दिखाई देने लगा हैं। पहले तो इन इलाकों मे जानें का रास्ता भी नहीं था पुलिस को बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी।अब तो सड़क भी बन गई हैं लेकिन अभी भी इलाकों मे और विकास होना बांकी हैं।