दरभंगा लोकसभा सीट,भाजपा व राजद में होगी सीधी टक्कर
वर्तमान सांसद गोपाल जी ठाकुर से फ़रियायेंगे विधायक ललित यादव।
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा में लोकसभा सीट को लेकर भले ही कवायत कोई भी पार्टी करे लेकिन कांग्रेस के बाद जनसंघ या बीजेपी का ही लंबे समय से इस सीट पर कब्जा है।
मिथिला की पहचान पग पग पोखर माँछ मखान रही है।दरभंगा लोकसभा पर आजादी के बाद से देश में आपातकाल लगने तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा। इसके बाद भारतीय लोक दल, लोक दल, जनता दल, राजद और बीजेपी का प्रभाव जरूर दिखा और यह सीट बीजेपी के लिये वरदान साबित हो गया। मिथिला लोक संस्कृति के केंद्र दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा मुद्दा कोसी की बाढ़ और कई इलाको में पड़ने वाला सुखाड़ है। साथ ही रोजगार की मुकम्मल व्यवस्था न होना भी चुनावी मुद्दा रहा है। आम, पान और मखाना की खेती के अलावे मछलीपालन के लिए प्रसिद्ध दरभंगा लोकसभा सीट की पहचान इसके गौरवशाली अतीत और समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भरी पड़ी है। दरभंगा राज परिवार की शान -शौकत, दानवीरता, कला और शिक्षा एवं अन्य कई चीजों को लेकर शिद्दत से याद किया जाता रहा है।
दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण
दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। इनमें दरभंगा नगर, दरभंगा ग्रामीण, बहादुरपुर, अलीनगर, बेनीपुर और गौड़ा बौराम विधानसभा सीट शामिल है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, दरभंगा लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी 13,07,067 है। इसमें 6,01,794 महिला और 7,05,273 पुरुष मतदाता हैं। दरभंगा लोकसभा सीट पर ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम वोटर निर्णायक होते हैं। लोकसभा सीट पर मुसलमान वोटरों की संख्या साढ़े तीन लाख है।जब्कि यादव और ब्राह्मण जाति के वोटरों की संख्या तीन-तीन लाख के करीब है। सवर्ण जातियों में राजपूत और भूमिहार वोटरों की आबादी एक-एक लाख है। सहनी समेत कई अतिपिछड़ी जातियों के अलावा अनुसूचित जाति के वोटर भी ठीक ठाक संख्या में हैं।
दरभंगा से जीतने वाले पांच सांसद केंद्र में मंत्री रहे और आजादी के बाद ललित नारायण मिश्र ने दरभंगा को देशभर में पहचान दिलाई।यह राजनीतिज्ञ परिपेक्ष मे देखा जाता है।
लेकिन दरभंगा राज परिवार के कारण दरभंगा को पूरे विश्व मे ख्याति प्राप्त थी और राज परिवार के सभी राजा -महाराजा दरभंगा के नाम को हमेशा आगे रखा।
दरभंगा एम्स को लेकर हुई जबरदस्त राजनीति
हाल के दशक में दरभंगा एयरपोर्ट और दरभंगा एम्स को लेकर राजनीतिक चर्चा ने भी इस लोकसभा सीट को सुर्खियों में रहा है। दरभंगा लोकसभा सीट से जीतने वाले पांच सांसद केंद्र में मंत्री रहे हैं। इनमें सत्यनारायण सिन्हा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और फिर सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने। उनके बाद 1973-75 तक ललित नारायण मिश्र रेल मंत्री रहे। कैबिनेट में पंडित हरिनाथ मिश्र को भी जगह मिली। शकिलुर्ररहमान चार माह तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे। 1991 में मो. अली अशरफ फातमी भी केंद्रीय राज्य मंत्री बने थे।
दरभंगा लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास
दरभंगा लोकसभा सीट पर 1952 से 1971 के आम चुनाव तक लगातार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार जीतते रहे। आपातकाल के बाद 1977 में दरभंगा लोकसभा सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल गई। इसके बाद 1980 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया, लेकिन उसके बाद फिर कांग्रेस कभी दरभंगा में जीत हासिल नहीं कर पाई। दरभंगा लोकसभा सीट पर कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा बार बीजेपी का कब्जा रहा। उसके बाद जनता दल और राजद का नंबर है।
1999 के बाद बस एक बार बीजेपी ने सीट गंवाई और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 1999 में एनडीए बनने के बाद दरभंगा लोकसभा सीट पर कीर्ति झा आजाद ने पहली बार बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की। वाजपेयी ने दरभंगा के राज मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया था।
दरभंगा में ससुराल होने का लाभ भी कार्ति झा आजाद को मिला था। इसके बाद महज एक बार 2004 में राजद ने दरभंगा सीट को झटका, लेकिन उसके बाद से लगातार दरभंगा लोकसभा सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है।
दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर पर बीजेपी का भरोसा ,दूसरी बार मिला टिकट
लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने पूर्व विधायक डॉ. गोपाल जी ठाकुर को मैदान मे उतारा । उन्होंने राजद के उम्मीदवार अब्दुल बारी सिद्दीकी को हराया था। लोकसभा चुनाव 2024 में एक बार फिर बीजेपी और जदयू साथ है। दरभंगा से बीजेपी ने फिर वर्तमान सांसद गोपाल जी ठाकुर पर विश्वास जताया है और सामने होंगे राजद से छह बार विधायक रहे ललित कुमार यादव। इसी दोनों के बीच सीधी टक्कर तय मानी जा रही है।
