पुलिस लाइन के तात्कालीन रक्षित अवर निरीक्षक(1) के कारनामों के कई परत ,बहादुरपुर थाना के पूर्व के थानाध्यक्ष को पुअनि से उच्चतर प्रभार दिलाने मे इनकी भूमिका अहम ,अंकों के खेल मे है माहिर।

दरभंगा /संजय कुमार राय

मिथिला क्षेत्र के आईजी कार्यालय मे पदस्थापित एसआई नीलम कुमारी को आखिरकार उच्चतर प्रभार नहीं मिला। करीब दो माह पूर्व उसका स्थानांतरण मोतिहारी जिलाबल मे हो गया। एसआई नीलम को उच्चतर प्रभार नहीं मिलने से फिलहाल वह इंस्पेक्टर नहीं बन पायी लेकिन इस मामले मे तात्कालीन आईजी ,तात्कालीन एसएसपी के अलावे पूर्व के रक्षित अवर निरीक्षक 1 की गलत कार्यशैली चर्चा का विषय है ।

कई पुलिस पदाधिकारियों ने बताया कि पुलिस लाइन मे जमे रक्षित अवर निरीक्षक( 1) सत्य नारायण पाण्डेय द्वारा अंकों का खेल खेला गया है।

अगर रअनि श्री पाण्डेय ने यह खेल नहीं खेला होता तो बहादुरपुर थाना के तात्कालीन थानाध्यक्ष नीरज कुमार वर्मा इंस्पेक्टर नहीं बन पाते। उन्हें उच्चतर प्रभार दिलाने के लिये पूर्व के एसएसपी और पूर्व के आईजी ने एड़ी चोटी एक कर दिया था इस कारण आईजी कार्यालय कर्मी ने भी वहीं किया जो सभी चाह रहें थे।

आईजी कार्यालय द्वारा इस मामले मे संज्ञान लेकर वरीयता सूची को संशोधित किया जा सकता था लेकिन एसपी /आईजी कार्यालय ने भी ऐसा नहीं किया ।

इसे लेकर कई बार बिहार पुलिस मुख्यालय ने आईजी /एसपी को संशोधित वरीयता सूची भेजने का निर्देश दिया था।लेकिन इन सबो ने बार बार वहीं किया जो नहीं करना चाहिये था।

रक्षित अवर निरीक्षक1 द्वारा किये गये इस खेल मे जांच कर कारवाई होनी चाहिये थी जो अबतक नहीं हो सका है ।

यहां गौर करने वाली बात यह है कि पुअनि नीरज कुमार वर्मा का वरीयता क्रम 9937(A)था और आईजी कार्यालय मे तैनात पुअनि नीलम कुमारी का वरीयता क्रमांक 9805 था । पुअनि नीलम कुमारी का वरीयता क्रमांक नीरज कुमार वर्मा से करीब 132अंक कम है फिर स्वाभाविक है कि पुअनि नीलम कुमारी को उच्चतर प्रभार मिलना चाहिए लेकिन उच्चतर प्रभार पुअनि नीरज कुमार वर्मा को मिल गया । यही नहीं पुअनि नीलम कुमारी 2009बैच की पुलिस पदाधिकारी है जब्कि पुअनि नीरज कुमार वर्मा 2017बैच के पुलिस अधिकारी थे । आप वरीयता क्रम देखें या दोनों पुलिस पदाधिकारी का योगदान तिथि देखिये ,दोनों ही स्थिति मे नीलम कुमारी ही अव्वल है और उसे ही उच्चतर प्रभार से वंचित कर दिया गया।

दरअसल पुअनि नीरज कुमार वर्मा का वरीयता क्रम पुलिस लाइन के रक्षित अवर निरीक्षक श्री पाण्डेय द्वारा 9734यानि पुअनि नीलम कुमारी से बहूत कम अंक कर एसएसपी एवं आईजी कार्यालय भेजा गया था और यही वरीयता क्रम आईजी कार्यालय ने पुलिस मुख्यालय को भेज दिया  । पुलिस मुख्यालय ने भी इस कारण पुअनि नीरज कुमार वर्मा को ही उच्चतर प्रभार दे दिया जो नियमाकुल नहीं था ।
अब सवाल यही उठता है कि आखिर इस प्रोन्नति के मामले मे कौन ऐसा पुलिसकर्मी है जिसकी गलती का कोपभाजन पुअनि नीलम कुमारी को भुगतना पड़ा । कहीं जातीय खेल तो नहीं हुआ। उस वक्त आईजी ,एसएसपी और एसआई नीरज कुमार वर्मा एक ही जाति के थे। कहीं इस समीकरण को लेकर एसआई नीरज वर्मा को उच्चतर प्रभार तो नहीं दिया गया ?
इस मामले मे जांचकर दोषी पुलिस पदाधिकारी के विरुद्ध कारवाई होनी चाहिये थी जो अबतक नहीं हुआ।
अब सवाल उठता है कि पुअनि नीरज कुमार वर्मा का वरीयता क्रम 9734 आखिर कैसे हो गया क्यूंकि यह अंक तो रअनि श्री पाण्डेय ने ही वरीयता क्रम मे दर्शाया था।
इस बाबत जब रक्षित अवर निरीक्षक सत्यनारायण पाण्डेय से उस वक्त जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने कहा कि हमारे स्तर से यह गड़बड़ी नहीं हुई है यह सारा गड़बड़ी पुलिस मुख्यालय से हुई है।
फिर हमने उनसे पूछा कि वरीयता क्रमांक आपने किस आधार पर 9734निर्धारित किया है जब्कि मुख्यालय के सूची मे पुअनि नीरज वर्मा का 9937(A)है। फिर रक्षित अवर निरीक्षक श्री पाण्डेय ने जवाब दिया था कि उनके द्वारा प्रस्ताव मुख्यालय को 20अगस्त 23के तिथि मे भेजा गया ,इसके बाद दुबारा उन्होंने 18सितंबर को प्रस्ताव भेजा था। रक्षित अवर निरीक्षक श्री पाण्डेय से फिर मैंने पूछा कि पुअनि नीरज वर्मा का वरीयता क्रमांक 9937(A)से
203अंक कम करके 9734कैसे हुआ तो उनका जवाब था कि यह पुलिस मुख्यालय की गलती के कारण हुआ है और कई प्रश्नों के जवाब मे उनका जवाब संतुलित नहीं था।

अब फिर से सवाल वहीं खड़ा होता है कि पुलिस केन्द्र से वरीयता क्रम किस आधार पर तय की गई।

पुलिस मुख्यालय ने तीन तीन बार सभी क्षेत्र के आईजी को अवगत कराया कि वरीयता सूची को संशोधित करते हुये पुलिस मुख्यालय को अवगत कराएं बावजूद इसके पुअनि नीलम कुमारी का नाम उच्चतर प्रभार मे शामिल नहीं किया। सूची मे  9734 अंक मे पश्चिम चंपारण के बेतिया मे पदस्थापित एक पुअनि का नाम था लेकिन पुलिस केन्द्र से पुअनि नीरज कुमार वर्मा  का अंक 9734हो गया।यही नहीं पुअनि नीरज वर्मा उस वक्त मब्बी ओपी प्रभारी थे और उनकी पोस्टिंग कुछ दिनों पहले हुई थी लेकिन उन्हें उच्चतर प्रभार मिलते ही रातोंरात तात्कालीन एसएसपी ने बहादुरपुर थाना का थानाध्यक्ष बना दिया।