नेहरा ओपी के तात्कालीन ओपी अध्यक्ष का कहीं शराब माफियाओं से तालमेल तो नहीं ?बरामद पिस्टल गोली और शराब के मामले मे कौन दिया था टेक्निकल सेल को सूचना ?सूचना देने वाला ही रच दिया था साजिश ?
नेहरा ओपी के तात्कालीन ओपी अध्यक्ष का कहीं शराब माफियाओं से तालमेल तो नहीं ?बरामद पिस्टल गोली और शराब के मामले मे कौन दिया था टेक्निकल सेल को सूचना ?सूचना देने वाला ही रच दिया था साजिश ?
नेहरा ओपी के तात्कालीन ओपी अध्यक्ष का कहीं शराब माफियाओं से तालमेल तो नहीं ?बरामद पिस्टल गोली और शराब के मामले मे कौन दिया था टेक्निकल सेल को सूचना ?सूचना देने वाला ही रच दिया था साजिश ?
दरभंगा /संजय कुमार राय
नेहरा ओपी के रामनगर गांव से पिस्टल ,गोली एवं शराब के बरामदगी के मामले मे तरह तरह की चर्चा लोंगों के जुबान पर है। चर्चा यह भी है कि पूर्व के थानाध्यक्ष यहां से बदल तो दिये गये लेकिन आज भी उनकी आत्मा नेहरा ओपी और उसके इलाके के इर्द गिर्द घूम रही है। तरह तरह की चर्चाएं हो रही है। लोंगों का कहना है कि एक गरीब आदमी के परिवार को इस तरह से तंग तबाह करना क्या यह इंसानियत है ?स्थानीय लोग कहते है कि एक पुलिस पदाधिकारी से लोंगों की कितनी उम्मीदें जुड़ी रहती है लेकिन पुलिस कर्मी ही इस तरह का घिनौना हरकत करने लगे तो लोंगों का विश्वास पुलिस से उठ जाता है। लोंगों का कहना है कि इस मामले मे पूर्व थानाध्यक्ष सत्य नारायण पाण्डेय की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
वैसे नेहरा ओपी के चालक परवेज तो खुलेआम यह कहते नजर आ रहा है कि उसके घर मिलें पिस्टल गोली और शराब की बरामदगी पूर्व थानाध्यक्ष श्री पाण्डेय की सोची समझी साजिश है ?
परवेज द्वारा एसएसपी को दिये गये आवेदन मे स्पष्ट रूप से कहना है कि पूर्व के थानाध्यक्ष सत्य नारायण पाण्डेय और कई शराब माफियाओं मे तालमेल था ?परवेज यह भी कहता है कि आज के दिनों मे भी कई शराब माफिया वहां तक पैसा पहुंचाता है ॥
अब सवाल उठता है कि चालक परवेज के गेरेज़ के छत पर पिस्टल गोली और शराब किसने रखा? बोरे मे रखा अवैध हथियार ,गोली के बारे मे दरभंगा पुलिस को किसने खबर किया ?दरभंगा पुलिस को या टेक्निकल सेल के किसी कर्मी को अगर यह सूचना मिला तो सूचना देने वाला वह व्यक्ति कौन है ? उसके पास तक यह सूचना कैसे पहुंची ?यह जांच का विषय है। यह पता चल जाय कि सूचना देने वाला पहला व्यक्ति कौन था तो नेहरा ओपी मे दर्ज कांड 30/24का अनुसंधान ही पूरा हो जाएगा। इस मामले मे अनुसंधानकर्ता को बस इतना ही तो पता करना है ?
क्यूंकि गाड़ी चालक परवेज का गेरेज सड़क के किनारे है। ऐसा लगता है कि किसी ने सड़क से ही बोरा को उसके छत पर रख दिया ? अचानक दरभंगा पुलिस की टीम आई और सिर्फ उस छत से बोरा उतारकर अपने साथ ले गई जिसमें पिस्टल ,गोली और शराब था। अगर सूचक वास्तव मे सही व्यक्ति रहता तो सबसे पहले नेहरा ओपी अध्यक्ष को फोन कर सूचना देता लेकिन इस मामले मे ऐसा नहीं हुआ है ?मतलब साफ है कि एक प्लानिंग के तहत इस काम को अंजाम दिया गया है। इसके लिये अनुसंधानकर्ता को कॉल डिटेल्स निकालना पड़ेगा और उसकी सघन जांच करनी होगी। टेक्निकल सेल के कर्मी को जरूर पता होना चाहिये कि पहला कॉल किसने किया था ?फिर दावे के साथ यह कहा जा सकता है कि यही व्यक्ति साजिशकर्ता है। अगर किसी पुलिस के पदाधिकारी द्वारा इस मामले मे साजिश की बू आती है तो ऐसे घटिया मानसिकता वाले पुलिस पदाधिकारी को बर्खास्त कर देना चाहिये ?हालांकि परवेज को दरभंगा के एसएसपी पर पूरा भरोसा है कि उसे न्याय मिलेगा।
दरभंगा पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के बाद बरामद हथियार और शराब के मामले मे अज्ञात के विरुद्ध (30/24)नेहरा पुलिस मे प्राथमिकी दर्ज करायी गई है,उक्त प्राथमिकी मे घर के किसी आदमी को आरोपित नहीं किया गया है। मतलब साफ है कि दरभंगा से गई पुलिस को भी यह शक है कि यह अवैध सामान किसी और ने रखकर पुलिस को सूचना दिया ताकि चालक परवेज समेत उसके परिजन इस मामले मे फंस जाय।
हालांकि इस गंभीर मामले की बात सुनकर मों परवेज की माँ को हार्ड -अटेक आ गया और कुछ दिनों मे ही उसकी मृत्यु हो गई। इस मृत्यु का कारण भी वहीं साजिशकर्ता है ,अगर इस तरह की घटना सामने नहीं आती तो शायद परवेज की माँ जिंदा होती ?ऐसे मे कहा जा सकता है कि इस मामले मे चालक की माँ के मौत का कारण भी साजिशकर्ता ही है।अब टेक्निकल सेल के कर्मी ही बता सकते है कि परवेज के छत से बरामद शराब ,गोली और पिस्टल के बारे मे सूचना कौन दिया था ?