दरभंगा जिलाबल मे पुलिस के तमाम पदाधिकारियों के चेहरे बदलने के बाद भी नहीं बदला पुलिसिया कार्यशैली ,थाना मे बैठे है ऑन डयूटी ,पाण्डेय जी बजा रहें है सिटी।
दरभंगा जिलाबल मे पुलिस के तमाम पदाधिकारियों के चेहरे बदलने के बाद भी नहीं बदला पुलिसिया कार्यशैली ,थाना मे बैठे है ऑन डयूटी ,पाण्डेय जी बजा रहें है सिटी।
दरभंगा जिलाबल मे पुलिस के तमाम पदाधिकारियों के चेहरे बदलने के बाद भी नहीं बदला पुलिसिया कार्यशैली ,थाना मे बैठे है ऑन डयूटी ,पाण्डेय जी बजा रहें है सिटी।
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा पुलिस के चेहरे बदल गये लेकिन कार्यशैली मे कोई बदलाव नहीं दिख रहा है ,लोंगों की उम्मीदें थी कि अब पुलिस मे बहूत कुछ बदलाव दिखेगा लेकिन सब कुछ वहीं है।कोई पुलिसवाला अपनी दुश्मनी निकालने के लिये कही शराब और देशी कट्टा रखवा देता है और निर्दोष को फंसा देता है तो कोई पुलिस वाला ट्रक मे बरामद हुये शराब को छोड़ देता है और पैसों की उगाही कर लेता है।अगर ऐसे मामलों को कोई पत्रकार उजागर करता है तो पूरा सिस्टम मिलकर उसपर प्राथमिकी दर्ज कराता है अगर कोई आरटीआई एक्टिविस्ट ऐसे मामलों मे जानकारी जुटाता है तो उसपर भी पुलिस टूट पड़ती है।
भाई पुलिस का काम है ,पुलिस ही जानें ?
एक गाना तीन दशक पहले बहूत हिट हुआ था ,गाना था
आईना वहीं रहता है बस चेहरे बदल जाते है।
जी हम बात कर रहें है पुलिस विभाग की ,जिला के तमाम वर्दीधारक की सूरत बदल गई है लेकिन वर्दी वहीं है ,रंग है खाकी।
खाकी वर्दी के कमाल तो बहूत है ,पर वास्तव मे इनकी इमानदारी है ? कुछ ही पुलिस वाले ईमानदार दिखाई पड़ते है जिसके कारण पूरा सिस्टम खड़ा है और लोग विभाग के अनुशासन की बात करते है ,दरअसल न्याय की पहली सीढ़ी की शुरुआत खाकी से होती है।वर्दी के तेवर अलग होते है और इनकी पहचान भी अलग है।
बदल गये जिला के तमाम पुलिस पदाधिकारी लेकिन कार्यशैली जस के तस
डीआईजी से लेकर सिटी एसपी समेत जिला के थानेदार तक तकरीबन सभी बदल गये ,कई थानेदार तो महज कुछ दिन मे बदल दिये गये ,वजह यह है की चुनाव आयोग के निर्देश को भला कौन टाल सकता है क्यूंकि लोकसभा चुनाव जो होना है। दरभंगा जिला के हालिया सूरत से आप अवगत होना चाहते है तो एसएसपी साहब की मंशा है कि जीरो टॉलरेंस पर जिला चले ,पुलिस की शिकायत कम हो। जिला मे बेहतर पुलिसिंग हो। इस कारण एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी कहते नजर आते है कि पुलिस अगर घुस मांगता है तो एसएसपी के व्हाट्सएप पर शिकायत करें।
सरकार का संसाधन पर्याप्त नहीं ?
पर ये सभी आदेश निर्देश सुनने और सुनाने मे अच्छे लगते है ,लेकिन व्यवहारिक जीवन मे पुलिसिंग के तरीके अलग है।
सरकार का संसाधन अभी भी कई मामलों मे उतना नहीं है कि बिना घुस के पैसों से थाना चल सके ?बिना घुस लिये थानेदार थाना कैसे चला पाएगा ?कोई अपना वेतन देकर थाना तो नहीं चला सकता ?कहने के लिये आप जितनी बड़ी बड़ी बातें कर ले लेकिन पुलिसिया व्यवस्था ऐसे ही चलते आया है।
एसएसपी साहब आप बेहतर पुलिसिंग का प्रयास जरूर कर रहें है लेकिन आपके इर्द गिर्द बैठा आपका कर्मी पूरे जिला मे आपको बदनाम कर देगा और बदनामी भी क्यू ना हो आप उसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर जो बैठा दिये। अब वह महाभारत के शकुनी की तरह चाल चल रहा है और उसपर आप अमल कर रहें है ?ऐसे मे लोग क्या समझेगा ,आप बेहतर समझ सकते है।
बगल की कुर्सी पर विराजमान है शातिर पुलिस पदाधिकारी ,इन्हें भी पहचानिये ?
आपके ही कृपा पात्र से ऐसे ऐसे पुलिसकर्मी /पदाधिकारी अब आपके अगल बगल विराजमान है जिनके चर्चे दरभंगा के गलियारो मे होती रहती है।
लोग एसएसपी समेत अन्य पदाधिकारी के ईमानदारी की चर्चे करते है लेकिन ऐसे ऐसे पुलिस पदाधिकारियो को अगर आपने अपने इर्द गिर्द रखा तो आपकी ईमानदारी पर लोग अंगुली उठाना शुरू कर देंगे।
यही नहीं अभी अभी जो थानेदार थानेदारी कर रहें है उनके कारनामे भी लिखे जायें तो आप सकते मे आ जाएंगे।
भीड़ मे गुम हो जाता है ईमानदारी ,सिस्टम मे ज्यादा है भ्रष्ट।
आपके एक ईमानदार होने से जिला मे ईमानदारी नहीं आयेगी। आप अपने इर्द गिर्द वैसे शातिर लोंगों को कुर्सी पर बैठा दिये है जिनके चर्चे भी बहूत है और उनके कारनामों की गिनती नहीं है ,आपके द्वारा इन्हें पदस्थापित करने के बाद आपके कार्यशैली पर भी प्रश्न उठना भी लाजमी है। तात्कालीन एसएसपी के पापाजी और तात्कालीन आईजी के दलालों की चर्चे आज भी लोंगों की जुबान पर है।दरभंगा के पुलिस के आला अधिकारियों के कार्यशैली से लोग तबाह थे यही नहीं इनके अधीनस्थ पुलिस पदाधिकारियों के क्या कहने थे ?कोई सरे आम घुस लेकर मांग रहा था तो कोई थाने से बरामद शराब को बेचवाकर नाच रहा था।अगर ऐसे ऐसे मामलों को कोई पत्रकार उजागर कर देता था तो जांच के बाद मामला सत्य पाये जानें पर भी कारवाई नदारद।अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहानी थी क्या उस कहानी को जिले मे फिर से दोहराने की मंशा है ?
डीआईजी ,एसएसपी एवं सिटी एसपी से लोंगों को बड़ी उम्मीदें।
नये डीआईजी ,एसएसपी और सिटी एसपी से दरभंगावासियों को काफी उम्मीदें जगी है । उम्मीद यही कि बेहतर पुलिसिंग होगी ,गरीबों को न्याय मिलेगा लेकिन कही वहीं बात ना हो जाय ?
जनता तो कमजोर है लाचार है ,वह हर मुसीबतों का सामना कर लेती है। यहां तक कि पुलिस के उस दंड को भी सहती है जिस दंड का वह भागीदार नहीं है।
एसएसपी साहब नेहरा ओपी मे एक चालक के खपरैल मकान के छत पर मिलें देशी कट्टा और शराब बरामदगी की जांच किसी ईमानदार पदाधिकारी से कराईये फिर पता चलेगा कि आपके पुलिस पदाधिकारी के द्वारा कितना घिनौना खेल खेला जाता है और कैसे निर्दोष को फंसाया जाता है ?ऐसे पुलिस पदाधिकारी को पहचानिये और उसपर कारवाई कीजिये फिर आपके ईमानदारी का डंका बजेगा। आपका थानेदार शराब के साथ ट्रक पकड़ता है और पैसे लेकर ट्रक छोड़ देता है। ड्राईवर और खलासी को दफा 109के तहत एसडीओ कोर्ट भेंज देता है। ठीक है अगर दफा 109के तहत एसडीओ कोर्ट भेंज देता है तो वह ट्रक कहां चला जाता है। कई मामले है ,पत्रकार के नाते मेरा काम है सूचना को आप तक या जनता तक पहुंचाना ?आपका काम है जांचों उपरांत कारवाई करना। आप जिला के एसएसपी है पता कीजिये कि ऐसे कौन से भ्रष्ट लोग आपके नजदीक कार्यालय मे है या फिर किसी थाने का थानेदार ?
वेसे , फिल्म दबंग का एक गाना बहूत चर्चित हुआ था जिसका एक गाना है ,थाना मे बैठे ऑन डयूटी ,पाण्डेय जी बजाए सिटी।