सपना था दारोगा बनने का ,पहुंच गया हवालात।”नो इंट्री “मे प्रवेश करने वाले चार चक्का वाहन चालकों से करता था अवैध वसूली ?नकली दारोगा गिरफ्तार।
सपना था दारोगा बनने का ,पहुंच गया हवालात।”नो इंट्री “मे प्रवेश करने वाले चार चक्का वाहन चालकों से करता था अवैध वसूली ?नकली दारोगा गिरफ्तार।
सपना था दारोगा बनने का ,पहुंच गया हवालात।”नो इंट्री “मे प्रवेश करने वाले चार चक्का वाहन चालकों से करता था अवैध वसूली ?नकली दारोगा गिरफ्तार।
दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा पुलिस ने एक फर्जी दारोगा को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार फर्जी दारोगा खुद को मनीगाछी थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव निवासी विजय कुमार साहू का पुत्र अशोक कुमार साहू बता रहा है। पुलिस इसके सत्यापन को लेकर जांच कर रही है।
पुलिस को नहीं लगी भनक
वहीं वर्दी ,वहीं स्टार पहनकर वह लोंगों को हेकड़ी दिखाता था और यह काम वह पिछले छः माह से कर रहा था लेकिन इस बीच पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सदर एसडीपीओ ने गुप्त सूचना पर कराया गिरफ्तार
सदर एसडीपीओ अमित कुमार ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि कोई नकली दारोगा बनकर वन वें मे घुसे वाहन चालकों से अवैध वसूली कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी सूचना पर उन्होंने यातायात प्रभारी कुमार गौरव को सत्यापन के लिये घटनास्थल पर भेजा गया था उनके साथ दो और सिपाही थे।
सदर एसडीपीओ ने कहा कि उसे हिरासत मे लेकर नगर थाना लाया गया और पूछताछ की गई तो पूरे मामले से पर्दा उठ गया। उन्होंने बताया कि ट्रेफिक दारोगा बनकर अवैध वसूली करते नकली दारोगा अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया।
तीन बार दारोगा भर्ती मे दिया था परीक्षा
वहीं पकड़े गये नकली दारोगा अशोक ने बताया कि वह दारोगा के लिये तीन बार परीक्षा दिया था जिसमें वह उत्तीर्ण नहीं हों सका। उसने बताया कि उसका सपना दारोगा बनने का था लेकिन वह दारोगा नहीं बन सका।
नो इंट्री मे करता था वसूली
उसने खुलासा किया कि वह नो इंट्री का उलंघन करने वालों वाहन मालिक को रोकता था और धौंस जमाते हुये रुपये वसूल कर लेता था। यह काम वह मिर्जापुर ,दोनार आदि जगहों पर कर लिया करता था। उसने बताया कि इस दौरान वह गश्ती गाड़ी को देखकर छुप जाता था और हमेशा मुंह मे मास्क लगाये रहता था ताकि कोई पहचान नहीं सके। यह पूछने पर कि अब आप क्या करेंगे तो उसने बताया कि जेल जाकर पढ़ाई करेंगे और खूब पढ़कर इससे भी बड़ा पद हासिल करेंगे इसके लिये बीपीएससी का परीक्षा देंगे।
परिवार के लोग भी सकते मे ?
अशोक ने अपने परिवार वाले को भी अंधेरे मे रखा था। उसने घर वालों को बता रखा था कि उसकी नौकरी पुलिस मे लग गई है और वह यातायात पुलिस मे दारोगा है।
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