सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं की नजर पैनी ,सीओ की कार्यशैली पर उठ रहें हें सवाल ,प्राथमिकी दर्ज कराकर अपना पल्ला झाड़ा ?अनुसंधानक को करनी पड़ेगी मशक्कत।

सदर /दरभंगा

सदर थाना क्षेत्र के सारा मुहम्मदपुर मे भूमाफियाओं द्वारा सरकारी पोखरे के जमीन को कब्जा करने की कोशिश के मामले मे अब तक कारवाई नहीं होने से लोंगों के बीच चर्चा जोरों पर हैं ,इस मामले मे सदर थाना मे प्राथमिकी 870/23दर्ज हैं।सदर अंचल के कर्मी /पदाधिकारियों के गलत कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठ रहें हैं ?सवाल यही कि मौजा सारा मोहम्मदपुर मे पोखरा भराई करने वाले भूमाफियाओं के विरुद्ध कारवाई नहीं करना अंचल के कर्मी /पदाधिकारी के कार्यशैली को दर्शा रहा हैं ?

सीओ के निर्देश पर राजस्व कर्मचारी नेहाल अहमद ने जो सदर थाना मे प्राथमिकी (870/23) 25दिसंबर 23को दर्ज कराया था उसमें किसी भी व्यक्ति को नामजद नहीं करना संदेह पैदा करता हैं जब्कि मट्टी भराई का काम महीनों से चल रहा था। स्थानीय लोंगों के जुबान पर भी हैं कि वह भूमाफिया कौन था और प्राथमिकी मे उसे नामजद क्यू नहीं किया गया  ?स्थानीय लोंगों द्वारा सरकारी पोखरा को लेकर बार बार विरोध करने के बाद जिला परिषद सदस्य विभा देवी ने डीएम और एसएसपी को लिखित आवेदन देकर कारवाई का अनुरोध किया था। इस आवेदन के आलोक मे डीएम के पहल पर सीओ ने राजस्व कर्मचारी नेहाल अहमद को मोहरा बनाकर सदर थाना मे अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया । लेकिन नेहाल अहमद ने कागजी खानापूर्ति की और अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी ?नेहाल अहमद ने दर्ज प्राथमिकी मे कहा हैं कि 25दिसंबर 23को सूचना मिलते ही घटना स्थल पर पहुंचा तो ड्राईवर तेजी से ट्रेक्टर लेकर भाग गया लेकिन मे उसका चेहरा देख लिया हूँ और पहचान सकता हूँ ?ऐसे मे प्रश्न उठता हैं अगर तेजी से भागते ड्राईवर को राजस्व कर्मचारी देख सकते हैं और पहचान सकते हैं तो ट्रेक्टर का नंबर भी लिख सकते थे , लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया ?एक महीना से पोखरा का भराई हो रहा था तो क्या राजस्व कर्मचारी या सीओ को पता नहीं था ?

दरअसल सदर सीओ इस जिला के वैसे पारंगत अंचलाधिकारी हैं जिनके उल्टे सीधे कार्यों को उनके कार्यकाल के दौरान जांच करायी जाय तो बहूत सारे विवादित मामलों के खेल मे वह फंसते नजर आयेंगे। इस पोखरा को भरने मे जो जो भूमाफिया लगा  था उससे भी उनके गहरे रिश्ते बताये जा रहें हैं ।बताया जा रहा हें कि इस बात की जांच उनके पर्सनल नंबर से हो सकती हैं। सीओ के गलत कारनामे के ही कारण जमीन के इतने विवाद हैं।

दरभंगा मे अगर आप देखेंगे तो कितने पोखर भर दिये गये और उसका दाखिल खारिज ऐसे ही सीओ के कारण हो गया।सरकार द्वारा अधिग्रहित कितने जमीन ऐसे हैं जो सीओ के तालमेल से जमीन का रजिस्ट्री हुआ और ऐसे ही सीओ के द्वारा दाखिल खारिज कर दिया गया।
बताया जा रहा हैं कि इसके एवज मे मोटी रकम लेकर भूमाफियाओ को मदद पहुंचाया जाता हैं। अगर ऐसा नहीं हैं हैं तो राजस्व कर्मचारी द्वारा दर्ज कराये प्राथमिकी मे भूमाफियाओं का नाम क्यू नहीं दर्शाया गया ?सीओ का कहना हें वें किसी भूमाफिया को नहीं जानते और सूचना मिलते ही उन्होंने कारवाई कर दी हें।उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकी दर्ज हों गई हें पुलिस अपना काम करेगी।

इधर  प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्यशैली भी संदेहास्पद हैं ,अगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर भू माफिया और ट्रेक्टर के बारे मे जानकारी ले तो पूरा मामला सामने आ जाएगा और भूमाफियाओं का चेहरा भी लोंगों के नजर मे आ जाएगा। इस मामले मे जिला प्रशासन और जिला पुलिस सख्ती से कारवाई करें तो आने वाले समय मे ऐसे भूमाफियाओं पर लगाम लग सकता हैं। शहर के तमाम पोखरे को पुलिस और सीओ के गलत कार्यशैली से पूर्व मे भरा जा चुका हैं और बड़े बड़े भवन का निर्माण भी हो चुका हैं अब बचे पोखरा या तालाब को बचाना जिला प्रशासन /जिला पुलिस की जवाबदेही भी हैं।