कौन हैं डीएसपी विप्लव ?एक माह पूर्व हाजीपुर मे धरायें मुन्ना भाई ने आखिर क्यू बताया डीएसपी विप्लव का नाम ?केंद्राधीक्षक के पत्र मे हैं डीएसपी विप्लव की चर्चा ,अब सुर्खियों मे।

दरभंगा /संजय कुमार राय

वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित नगर थाने मे एक माह पूर्व धराये मुन्ना भाई के मामले मे दर्ज की गई प्राथमिकी मे एक डीएसपी का नाम आ जानें से तरह तरह की चर्चाएं लोग करने लगे हैं। लोग उत्सुक हो गये हैं कि पुलिस के पकड़ मे आयें मुन्ना भाई ने आखिर एक डीएसपी का चर्चा कैसे कर दिया ?कही ऐसा तो नहीं कि विभिन्न परीक्षा प्रतियोगिता मे उत्तीर्ण कराने के लिये शेटिंग किया जा रहा हो और इसके बदले मोटी रकम उगाही की जा रही हो ,कही यह बड़ा नेटवर्क तो नहीं जिसके माध्यम से यह खेल खेला जा रहा हो ?यह जांच का विषय हैं ?
यह हम नहीं कह रहें हैं ,हाजीपुर स्थित नगर थाना के एक आवेदन मे वह पत्र बोल रहा हैं।

केंद्राधीक्षक ने नगर थाने को दिये आवेदन मे एक डीएसपी का किया हैं जिक्र।

जी ए इंटर विद्यालय के केंद्राधीक्षक विनोद कुमार ने 9दिसंबर को नगर थाना हाजीपुर मे एक पत्र थाना प्रभारी के नाम से लिखा हैं। उक्त पत्र मे कहा गया हैं कि परीक्षा केन्द्र VAI-8073पर कमरा संख्या 27मे आयोजित BPSC विद्यालय अध्यापक नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी मृत्युंजय कुमार हिमांशु रोल नंबर 163437के स्थान पर एक फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा दें रहा था। पूछताछ के दौरान उक्त अभ्यर्थी ने अपना नाम राधे श्याम सिंह का पुत्र राकेश कुमार उर्फ नारद बताया जो फुलवारीशरीफ पटना का रहने वाला हैं । परीक्षा देते वक्त पकड़े जानें पर उसने  केंद्राधीक्षक को बताया था कि अगर वह पकड़ा जाता हैं तो डीएसपी विप्लव जी का नाम बताना और उनसे बात करा देना। फर्जी परीक्षार्थी राकेश ने विवेक और विशाल का नाम बताते हुये  कि विशाल और विवेक का मोबाईल  नंबर 9801591642एवं 7667090285 हैं ?अब सवाल यही हैं कि कौन हैं विशाल और विवेक ?दोनों का संबंध उक्त डीएसपी से आखिर क्या हैं ?विशाल और विवेक के मोबाईल का कॉल डिटेल अगर पुलिस निकाले तो पता चल सकता हैं कि विवेक और विशाल से उक्त डीएसपी का संबंध  हैं अथवा नहीं ?

हालांकि राकेश के पकड़े जानें के बाद वहां नियुक्त पुलिस पदाधिकारी ने इस नंबर पर फोन किया लेकिन विशाल और विवेक ने फोन नहीं उठाया।

उस केन्द्र पर दूसरे के नाम पर परीक्षा दे रहें पकड़ाये राकेश ने आखिर डीएसपी विप्लव का नाम कैसे कह दिया ?यही सवाल हैं कि कही इस तरह के परीक्षा मे उत्तीर्ण कराने के लिये कोई गेंग सक्रिय तो नहीं हैं। विशाल और विवेक इस गेंग का पिद्दी तो नहीं ,बादशाह कोई और हो।
ऐसा चर्चा मे बात आ रही हैं कि कई बड़े बड़े अधिकारीगण ऐसे परीक्षाओं मे पास कराने के लिये मोटे पैसे की उगाही कर लेते हैं और परीक्षार्थी के बदले कोई और परीक्षा दें रहा होता हैं। पकड़े जानें पर उसे नाम नहीं बताने का दबाव पहले से ही दें दिया जाता हैं लेकिन पकड़ाने के बाद दबाव पूर्वक पूछा जाता हैं तो सच्चाई सामने आ जाती हैं।

ऐसे ऐसे कांडों की जांच टेक्निकल सेल की सहायता से होनी चाहिये ताकि ऐसे मुन्ना भाई के सरदारों का पता चल सके। इस मामले मे अगर डीएसपी विप्लव का नाम फर्जी परीक्षार्थी ने बताया हैं तो इस मामले मे जांच होनी चाहिये ताकि मामले का  खुलासा हो सके।