मोटरसाईकिल के हल्के धक्के से रतनपुरा पुल पर पुलिस चेकिंग के दौरान महिला सिपाही घायल, दो गिरफ्तार , 72घंटे थाना हाजत में रखने के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में ??क्या डेढ़ लाख रुपये लेने का पुलिस द्वारा चल रहा था डील ,अगर नहीं तो थाना हाजत में इतने घंटे रखने का क्या औचित्य ??जांच के बाद ही उठेगा पर्दा ?
मोटरसाईकिल के हल्के धक्के से रतनपुरा पुल पर पुलिस चेकिंग के दौरान महिला सिपाही घायल, दो गिरफ्तार , 72घंटे थाना हाजत में रखने के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में ??क्या डेढ़ लाख रुपये लेने का पुलिस द्वारा चल रहा था डील ,अगर नहीं तो थाना हाजत में इतने घंटे रखने का क्या औचित्य ??जांच के बाद ही उठेगा पर्दा ?
मोटरसाईकिल के हल्के धक्के से रतनपुरा पुल पर पुलिस चेकिंग के दौरान महिला सिपाही घायल, दो गिरफ्तार ,
72घंटे थाना हाजत में रखने के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में ??क्या डेढ़ लाख रुपये लेने का पुलिस द्वारा चल रहा था डील ,अगर नहीं तो थाना हाजत में इतने घंटे रखने का क्या औचित्य ??जांच के बाद ही उठेगा पर्दा ?
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
मोरो थाना क्षेत्र के रतनपुरा पुल पर वाहन जांच के दौरान पुलिस के रोकने पर भागने की कोशिश में एक महिला सिपाही घायल हो गई। घटना 18 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे की है। पुलिस ने मोटरसाइकिल चालक आशीष कुमार (19) और पीछे बैठे अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, बाइक की हेडलाइट बंद थी और चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। मामले में मोरो थाना कांड संख्या 113/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई है। घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी कैमरा नहीं मिला। वहीं,पुलिस पूछताछ में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार चालक ने बताया कि डर के कारण भागने के दौरान बाइक अनियंत्रित होकर महिला सिपाही से टकरा गई थी।
लेकिन इस मामले में परिजनों का जो आरोप हें वह होश उड़ाने वाला हें ?परिजनों का आरोप हें कि देर शाम मोरों थाना पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थीं ,इस दौरान बाईक चला रहें चालक पर टॉर्च की रोशनी दी गई ,मोटरसाइकिल चला रहें चालक का आंख रोशनी के कारण कुछ दिखाई नहीं दें रहा था ,इस कारण वह ब्रेक लगाया और वह मोटरसाईकिल से गिर पड़ा।गिरते क्रम में वह महिला सिपाही से टकराया और महिला सिपाही भी गिर पड़ी ,हो सकता हें कि महिला सिपाही को भी चोट लगी हो ,जिसके लिये वह बार बार गलती मांगा।लेकिन थाना पुलिस ने मोटरसाईकिल पर सवार दोनों युवक समेत मोटरसाईकिल को थाना लाया और हाजत में बंद कर दिया।परिजनों का आरोप हें कि घटना 18तारीख के देर शाम हुई थीं।परिजनों का आरोप हें कि दूसरे दिन भी पुलिस थाना हाजत में दोनों को रखा और खाना तक नहीं दिया ,परिजन कहते हें कि इसके बाद पुलिस डेढ़ लाख रुपये की नाजायज मांग करने लगी ,वह कहती हें कि एक मजदूर का परिजन डेढ़ लाख कहाँ से देता ,पुलिस पैसे मांगते रही और हम देने में अक्षम थे।परिजन कहते हें कि अगले दिन पैसे नहीं मिलने पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दोनों को देर शाम न्यायिक हिरासत में भेज दिया जो करीब 72घंटे का समय हें ?
अगर परिजनों की बात में सच्चाई हें तो सवाल उठता हें कि 72घंटे तक थाना हाजत में आरोपी को रखना कितना सही हें ?हालांकि दुर्गा पूजा को लेकर कोर्ट बंद था लेकिन जमानत ,रिमांड,कस्टडी को लेकर किसी ना किसी जज की जवाबदेही दी जाती हें जिसे” डिटेंशन ऑफ़ पीरियड “कहा जाता हें और अगर देखा जाय तो 20अक्टूबर 26 को दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया तो कहा जा सकता हें कि दुर्गापूजा के दौरान भी यह कारवाई न्यायालय से हुई।अब सवाल यही हें कि 72घंटे तक आरोपित को थाना में रखना कितना जायज हें या आरोपी के परिजन जो आरोप लगा रहें हें क्या वह सत्य हे क्यूंकि इतने घंटे तक हाजत में रखना परिजन के आरोप को पुष्टि करता हें।