दरभंगा में निकली भव्य श्री जगन्नाथ रथयात्रा,जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठा पूरा शहर,

क्रेन से चढ़ाया गया 108 भोग,भव्य रथयात्रा बनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र,

फूलों से सजे विशाल रथ पर विराजे भगवान जगन्नाथ,भक्तों ने श्रद्धा से खींचा रथ

दस्तक 7 मीडिया /दरभंगा

इस्कॉन मंदिर,दरभंगा की ओर से भगवान श्री जगन्नाथ,बड़े भाई बलदेव,बहन सुभद्रा और सुदर्शन की भव्य रथयात्रा बड़े ही धूमधाम,श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। रथयात्रा में दरभंगा सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे शहर में “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण,हरे राम” के जयकारों के साथ हरिनाम संकीर्तन होता रहा। विशाल और आकर्षक रथ पर विराजमान भगवान श्री जगन्नाथ ने नगरवासियों को दिव्य दर्शन दिए। जहां-जहां से रथ गुजरा,वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने श्रद्धा के साथ भगवान के दर्शन किए और रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य महसूस किया। रथयात्रा की शुरुआत पोलो फील्ड से हुई। यहां भगवान श्री जगन्नाथ,बलदेव,सुभद्रा और सुदर्शन जी को 108 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इसके बाद महाआरती कर विधिवत रथयात्रा शुरू की गई। यात्रा पोलो फील्ड से हजमा चौक,दारूभट्टी चौक,बाकरगंज,नाका नंबर-6,नाका नंबर-5,मिर्जापुर और टावर चौक होते हुए शुभंकरपुर स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंची,जहां इसका समापन हुआ। यात्रा शुरू होने से पहले पोलो फील्ड और समापन के बाद इस्कॉन मंदिर परिसर में सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था की गई थी।


इस वर्ष निकाला गया रथ लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। भगवान को एक आधुनिक और विशाल रथ पर विराजमान किया गया था। रथ को रंग-बिरंगे फूलों,सुंदर चित्रकारी और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। रथ की सबसे खास बात उसका आधुनिक हाइड्रॉलिक सिस्टम था। इसकी मदद से लगभग 10 फीट ऊंचे गुंबद को जरूरत के अनुसार ऊपर और नीचे किया जा रहा था,जिससे बिजली और संचार के तारों वाले रास्तों से रथ को सुरक्षित निकालने में आसानी हुई। श्रद्धालुओं का कहना था कि दरभंगा में अब तक इतनी भव्य और आधुनिक जगन्नाथ रथयात्रा पहले कभी नहीं निकली। पूरी यात्रा के दौरान भक्तजन रस्सी से रथ खींचते हुए हरिनाम संकीर्तन करते रहे। ढोल,मृदंग और झांझ की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते भगवान का गुणगान करते हुए आगे बढ़ रहे थे। “जय जगन्नाथ” के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया। यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों,दुकानों और छतों से भगवान के दर्शन करते नजर आए।

महिलाओं,बच्चों,युवाओं और बुजुर्गों सहित हर वर्ग के लोगों में उत्साह देखने को मिला। रथयात्रा के पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों,स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पानी,जूस,शरबत और प्रसाद की व्यवस्था की थी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया गया। पूरे मार्ग में भगवान का प्रसाद वितरित किया गया और लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि तथा समाज में शांति की कामना की।
रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण नाका नंबर-6 पर देखने को मिला। यहां क्रेन की सहायता से भगवान श्री जगन्नाथ,बलदेव,सुभद्रा और सुदर्शन जी को 108 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही भगवान को भोग अर्पित किया गया,पूरा वातावरण “जय जगन्नाथ” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस पल को अपनी आंखों में कैद किया और इसे रथयात्रा का सबसे यादगार क्षण बताया।
इस अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडे अपनी धर्मपत्नी के साथ रथयात्रा में शामिल हुए। इसके अलावा शहर के कई गणमान्य लोग,समाजसेवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे। इस्कॉन मंदिर के प्रबंधक लक्ष्मण कृपा दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि जो लोग किसी कारण मंदिर नहीं आ पाते,उन्हें दर्शन देने के लिए भगवान स्वयं रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ करुणा और दया के सागर हैं तथा रथयात्रा के माध्यम से सभी भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु रथयात्रा के दौरान भगवान के दर्शन करता है और श्रद्धा से रथ की रस्सी खींचता है,उसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस रथयात्रा में शामिल होते हैं। कार्यक्रम के अंत में लक्ष्मण कृपा दास ने सभी श्रद्धालुओं,शहरवासियों,प्रशासन,पुलिस,मीडिया, दानदाताओं और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद और आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी भक्तों को आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। इस अवसर पर मंदिर से जुड़े रमन रेती दास,सत्यनारायण हरि दास,गोकुल रंजन दास,चंद्रशेखर झा,भास्कर,श्रीसुखदेव दास,गोविंद दास,धीरज,सत्यम,यश सहित बड़ी संख्या में भक्तगण और स्वयंसेवक मौजूद रहे। रथयात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। लहेरियासराय थाना,नगर थाना,विश्वविद्यालय थाना और कोतवाली थाना के थाना अध्यक्ष अपने-अपने पुलिस बल के साथ पूरे मार्ग में तैनात रहे। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते रहे। प्रशासन और पुलिस की सतर्क व्यवस्था के कारण रथयात्रा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।