अधिवक्ताओं ने गुरुवार को हिन्दी दिवस मनाया। वकालतखाना भवन में गुरुवार को अधिवक्ताओं ने राजभाषा हिन्दी में न्यायिक कार्य करने का संकल्प लिया। वकिलों ने सभी प्रकार का वकालत कार्य राजभाषा हिन्दी में करने का संकल्प लिया।अधिवक्ता राजीव रंजन ठाकुर और रमणजी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार
चौधरी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिन्दी हमारे देश की राजभाषा है।इस अनुच्छेद में यह ब्यवस्था है कि संध की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।14 सितंबर 1949 में हीं देवनागरी लिपि में हिन्दी को भारत की आधिकारिक भाषा भारतीय संविधान में अंकित किया गया।पंडित जवाहरलाल नेहरु ने 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाने को रेखांकित किया और 1953 को प्रथम वार हिन्दी दिवस मनाया गया। यह दिवस विशेष मनाने का उद्देश्य हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार के लिए किया जाता है।
अधिवक्ता शिवशंकर झा ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के लिए काका कालेलकर,मैथिली शरण गुप्त, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोबिंद दास,राजेंद्र सिंह आदि बिभूतियों ने अविस्मरणीय योगदान दिया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है।लेकिन भारत के संविधान सभा ने हिन्दी को राष्ट्र भाषा की जगह राजभाषा घोषित किया गया। अधिवक्ता संजीव कुमार कुंवर ने कहा कि देश में पहला हिन्दी दिवस 1953 में मनाया गया ,तब से प्रतिबर्ष हम 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मना रहे हैं।मौके पर अधिवक्ता मायाशंकर चौधरी,रामवृक्ष सहनी,मनोज कुमार, कुमार उत्तम हीरानंद मिश्र,संपूर्णानंद झा,बुलन कुमार झा,सनोज कुमार रामशंकर चौधरी समेत दर्जनों अधिवक्ताओं और अधिवक्ता लिपिक संघ के बिनय कुमार झा ने सभी प्रकार का वकालतन लेखकीय कार्य राजभाषा हिंदी में करने का संकल्प लिया।