गौड़ा बौराम पीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार, डॉक्टरों की लापरवाही ने ली नवजात की जान, परिजनों का फूटा गुस्सा

दस्तक7मिडिया, अमीत झा गौड़ा बौराम, दरभंगा।

दरभंगा की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला गौड़ा बौराम प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां कथित तौर पर डॉक्टर और नर्स की घोर लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की दुनिया में कदम रखने से पहले ही मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया और परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
जानकारी के अनुसार, नदैय गांव निवासी कुमुद शर्मा ने अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव हेतु सोमवार को पीएचसी गौड़ा बौराम में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती करने के बाद न तो डॉक्टरों ने और न ही ड्यूटी पर तैनात नर्सों ने समय रहते उचित इलाज शुरू किया।
पीड़ित पिता कुमुद शर्मा ने सिसकते हुए बताया, “हम बार-बार गुहार लगाते रहे कि मरीज की स्थिति देख लीजिए, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई तत्परता नहीं दिखाई गई। अगर डॉक्टर सही समय पर इलाज शुरू कर देते, तो मेरा बच्चा आज जीवित होता।” डॉक्टरों की इसी लेटलतीफी का नतीजा यह हुआ कि बच्चा जन्म लेते ही मृत पाया गया।
यह घटना न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ले गई है, बल्कि बिहार के सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली पर भी कालिख पोत दी है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है।
अब सवाल उठता है कि जब महिला की स्थिति गंभीर थी, तो उसे तुरंत रेफर क्यों नहीं किया गया या समय पर इलाज क्यों नहीं मिला?
ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की इस लापरवाही की जवाबदेही किसकी है?
क्या स्वास्थ्य विभाग केवल कागजों पर ही ‘मिशन 60’ और ‘सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवा’ के दावे कर रहा है?
घटना के बाद से पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी डॉक्टर व कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।