भारत-नेपाल सीमा पर बसे सिंघीमारी पंचायत के आधा दर्जन गांव के लोग कनकई नदी के कारण टापू पर रहने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि इन गांव के लोगों के लिए मुख्य सड़क और प्रखंड मुख्यालय आना भी दुरूह है, लेकिन पड़ोसी देश नेपाल जाना आसान है। जिस कारण डाकूपाड़ा, पलसा, बलवाडांगी गांव के लोग नदी से आर-पार होनेवाली परेशानियों को देख दैनिक उपयोग के वस्तुओं की खरीद एवं इलाज के लिए नेपाल जाना पसंद करते हैं।
सीमावर्ती इन गांव से लोगों को प्रखंड मुख्यालय या नजदीकी के बाजार तक जाने के लिए भी नदी पर नाव और चचरी पुल का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए इन ग्रामीणों के लिए किशनगंज, बहादुरगंज या दिघलबैंक से समान लाना या ले जाना काफी मुश्किल काम है।
दरअसल, सिंधीमारी पंचायत के आधे दर्जन गांव कनकई नदी पार भारत नेपाल सीमा से सटकर बसा है। गांव को मुख्य सड़क तक जोड़ने के लिए बीच में कनकई नदी होने एवं पुल के अभाव में सीधे सड़क नहीं बन सकी है। स्थानीय लोग बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों को लेकर नेपाल के हाट बाजारों से जरूरत के सामान खरीदते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि उनकी बाइक छह महीने नदी पार मुख्य सड़क के दूसरे गांव के जानने वाले के घरों में रखना पड़ता है। लोग बताते हैं कि कनकई नदी का पानी घटने के बाद ग्रामीण अपने स्तर से चचरी पुल का निर्माण करते हैं।
