जनसुराज दल ने जारी की पहली सूची, 51 उम्मीदवार मैदान में; जातीय संतुलन पर खास फोकस,दरभंगा शहरी से पूर्व डीजी एवं दरभंगा के तात्कालीन आईजी आर के मिश्रा,केवटी से बिल्टु सहनी ,ग्रामीण से मो शोएब अहमद खान को मिला टिकट।

दस्तक 7मीडिया /गुड्डू राज 

बिहार विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ एक महीना बाकी है और सियासी सरगर्मी चरम पर है। इसी बीच प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज दल ने बड़ा कदम उठाते हुए 51 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है।

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पार्टी ने उम्मीदवार चयन में जातीय और सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा है। जारी लिस्ट के अनुसार—
• 7 उम्मीदवार अनुसूचित जाति (SC) से
• 17 उम्मीदवार अति पिछड़ा वर्ग से
• 11 उम्मीदवार पिछड़ा वर्ग से
• 8 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से
• और 8 उम्मीदवार सामान्य वर्ग से हैं।

बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे —
• पहला चरण: 6 नवंबर (121 सीटों पर मतदान)
• दूसरा चरण: 11 नवंबर (122 सीटों पर मतदान)

मुख्य उम्मीदवारों की सूची:

जनसुराज दल ने कई प्रमुख सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं —
बाल्मीकि नगर से दृढ़ नारायण प्रसाद, लौरिया से सुनील कुमार, सुरसंड से उषा किरण, ढाका से एलबी प्रसाद, बेनीपट्टी से मो. परवेज आलम, सहरसा से किशोर कुमार मुन्ना, भोरे से प्रीति किन्नर, और मांझी से वाई बी गिरी के अलावे कई अन्य  को टिकट दिया गया है।

दरभंगा की तीन सीटों पर उम्मीदवार घोषित:

दरभंगा जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भी जनसुराज दल ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है —
• दरभंगा शहरी: आर. के. मिश्रा


• केवटी: बिलटू सहनी


• दरभंगा ग्रामीण: मोहम्मद शोएब अहमद खान

पार्टी के अनुसार, उम्मीदवारों का चयन स्थानीय सर्वे, जनता की राय, सामाजिक संतुलन और स्वच्छ छवि के आधार पर किया गया है।

प्रशांत किशोर की रणनीति और जनसंदेश:

जनसुराज दल के संस्थापक प्रशांत किशोर पिछले दो वर्षों से राज्यभर में जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार की राजनीति को बदलने के लिए “ईमानदार और जनता से जुड़े उम्मीदवारों” को आगे लाना जरूरी है।
पार्टी ने जनता से अपील की है कि वह जाति और धर्म से ऊपर उठकर उन नेताओं को चुनें जो अपने क्षेत्र के विकास के लिए ईमानदारी से काम करें।

दरभंगा समेत कई जिलों में जनसुराज दल के उम्मीदवारों की घोषणा से चुनावी समीकरण में हलचल तेज हो गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक कोशिशें बिहार की जमीनी राजनीति में कितना असर दिखा पाती हैं।