‘चित्तौड़गढ़’ है पहली पसंद:पवन सिंह की नजर शाहाबाद के ‘चित्तौड़गढ़’ यानी बड़हरा पर है. वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल से आए राघवेंद्र प्रताप सिंह बीजेपी के विधायक हैं. राघवेंद्र प्रताप 2020 से पहले 1995, 2005 और 2010 में चुनाव जीते थे. फिलहाल उनकी उम्र 73 साल है. उम्र को लेकर अगर उनका टिकट कटता है तो पवन सिंह सबसे मजबूत दावेदार होंगे.

भोजपुरी स्टार पवन सिंह 

बड़हरा में राजपूत वोटर हैं डोमिनेंट:बड़हरा विधानसभा सीट पर राजपूत जाति के मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है. बडहरा में तकरीबन 12 से 14% के आसपास राजपूत जाति के मतदाताओं की संख्या है. हालांकि यादव मतदाता राजपूत से अधिक हैं और उनकी संख्या 16 से 18% के बीच है. 10 से 12% के बीच आबादी कोइरी-कुर्मी जाति की है. समीकरण के हिसाब से एनडीए उम्मीदवार भारी पड़ते हैं. लिहाजा यह सीट एनडीए के लिए जीत की गारंटी है.

आरा पर भी नजर:आरा विधानसभा सीट भी एनडीए का मजबूत किला है.​ सन 2000 में भारतीय जनता पार्टी के अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आरा सीट पर जीत हासिल की और तब से यह सीट बीजेपी का गढ़ बन गई. वह 5 बार 2000, 2005 के दोनों चुनाव, 2010 और 2020 में आरा से विधायक रहे हैं. हालांकि ​2015 में राष्ट्रीय जनता दल के मोहम्मद नवाज आलम जीते थे.

अमित शाह के साथ पवन सिंह 

संजय सिंह टाइगर भी दावेदार:अमरेंद्र प्रताप सिंह की उम्र 78 साल है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार बढ़ती उम्र के कारण उनकी जगह दूसरे प्रत्याशी की तलाश होगी. वैसे पूर्व विधायक संजय सिंह टाइगर भी आरा विधानसभा सीट के लिए पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार हैं. अब पवन सिंह की नजर भी इस विधानसभा सीट पर होगी.

राजपूत और यादवों की संख्या अधिक:यह जानना भी जरूरी है कि आरा विधानसभा सीट को क्यों बीजेपी के लिए मजबूत किला माना जाता है. आरा विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक वोटर राजपूत जाति के हैं. आरा विधान सभा क्षेत्र में राजपूत मतदाताओं की संख्या 35000 के आसपास है तो दूसरे स्थान पर यादव वोटर हैं. इनकी संख्या 28000 के आसपास है. 15% दलित आबादी भी निर्णायक साबित होती है. समीकरण को देखते हुए पवन सिंह के प्राथमिकता में आरा सीट हैं.

जेपी नड्डा के साथ पवन सिंह 

काराकाट से भाग्य आजमा सकते हैं पवन:काराकाट विधानसभा सीट पर भी पवन सिंह की नजर हैं. काराकाट लोकसभा सीट से ही पवन सिंह ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था. 2 लाख 74 हजार 723 मतों के साथ वह दूसरे स्थान पर रहे थे. वहीं उपेंद्र कुशवाहा तीसरे स्थान पर रहे. सीपीआई माले के राजाराम सिंह कुशवाहा ने जीत हासिल की थी.

राजपूतों की तादाद सबसे अधिक: बात अगर विधानसभा चुनाव की कर लें तो 2020 के विधानसभा चुनाव में काराकाट विधानसभा सीट से सीपीआईएमएल के अरुण सिंह चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे. काराकाट विधानसभा क्षेत्र में 35000 के आसपास राजपूत मतदाता हैं, जबकि यादव मतदाताओं की संख्या 29000 के आसपास है. राजपूत मतदाताओं को देखते हुए पवन सिंह की नजर इस सीट पर है.

उपेंद्र कुशवाहा के साथ पवन सिंह 

बीजेपी को पवन सिंह की जरूरत:राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार का मानना है कि पवन सिंह शाहाबाद के लिए मजबूत कड़ी साबित हो सकते हैं लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह के वजह से एनडीए को कई सीटों पर नुकसान हुआ था. संभव है कि भाजपा पवन सिंह को स्टार प्रचारक की भूमिका दे और पूरे बिहार में उन्हें प्रचार का जिम्मा सौंपा जाय .

बिहार बीजेपी के नेताओं के साथ पवन सिंह 

“पावर स्टार पवन सिंह शाहाबाद क्षेत्र से आते हैं और स्टारडम के वजह से उनके फैन फॉलोअर भी हैं. एनडीए को पवन सिंह के चलते विधानसभा चुनाव में फायदा हो सकता है. आरके सिंह के बगावत की धार भी पवन सिंह के जरिए भाजपा ने कुंद करने की कोशिश की है.”- डॉ. संजय कुमार, राजनीतिक विश्लेषक