गौड़ा बौराम विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकर्ता सम्मेलन में हुए शक्ति प्रदर्शन, पार्टी की अंदरूनी कलह को कर दिया उजागर।
गौड़ा बौराम विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकर्ता सम्मेलन में हुए शक्ति प्रदर्शन, पार्टी की अंदरूनी कलह को कर दिया उजागर।
गौड़ा बौराम विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकर्ता सम्मेलन में हुए शक्ति प्रदर्शन, पार्टी की अंदरूनी कलह को कर दिया उजागर।
दस्तक7मिडिया, बिरौल,दरभंगा।
शनिवार को गौड़ा बौराम विधानसभा के कोठराम में आयोजित एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन में उस समय अफरातफरी मच गई, जब कुछ स्थानीय नेताओं के समर्थक नारेबाजी और हंगामा करने लगे। बताया जा रहा है कि यह हंगामा भाजपा के ही उन नेताओं के समर्थकों ने किया, जो आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार हैं। हैरानी की बात यह है कि हंगामा करने वाले समर्थकों के नेता खुद मंच पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों को शांत कराने का कोई प्रयास नहीं किया।इस हंगामे के कारण सम्मेलन की गरिमा पर सवाल उठ गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष ललिता झा को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने खुद मोर्चा संभालकर कार्यकर्ताओं को शांत कराया। जबकि बिरौल विकास युवा मोर्चा के सदस्यों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है, सदस्यों ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि कार्यकर्ता सम्मेलन में कुछ लोगों द्वारा शक्ति प्रदर्शन करना किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं था। दुसरी ओर इस घटना को राजनीतिक गलियारों में अनुशासनहीनता के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने इस तरह का व्यवहार कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच गलत संदेश दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की आंतरिक खींचतान एनडीए के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। यह घटना न सिर्फ पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि भाजपा की साफ-सुथरी छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है।
इस घटना के बाद पार्टी पर जल्द से जल्द स्थिति को संभालने का दबाव बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि कार्यकर्ता सम्मेलन में शक्ति प्रदर्शन जैसी घटना पर अगर शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया, तो आगामी चुनाव में इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह घटना इस बात का संकेत है कि अगर टिकट बंटवारे से पहले इस तरह की गुटबाजी सामने आती है, तो चुनाव के दौरान पार्टी को एकजुट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।