डीपीएम की अध्यक्षता में कार्यशाला,बैंकिंग समस्याओं का मिला समाधान,जीविका दीदियों के लिए 215 करोड़ की निकासी लक्ष्य पर हुई रणनीति तय
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /
डीएमसीएच स्थित दीदी की रसोई परिसर में मंगलवार को बिहार ग्रामीण बैंक द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) डॉ. ऋचा गार्गी ने की।
उद्घाटन समारोह में डीपीएम बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मो.रियाजुद्दीन सूक्ष्म वित्त प्रबंधक सुबीर झा,एफआई नोडल नीरज कुमार एवं अन्य अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस अवसर पर जिले के सभी प्रखंडों के बीपीएम,बिहार ग्रामीण बैंक के शाखा प्रबंधक, विषयगत प्रबंधक तथा वित्तीय समावेशन नोडल बड़ी संख्या में शामिल हुए।
डीपीएम डॉ.गार्गी ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के वित्तीय समावेशन को और अधिक प्रोत्साहित करना है,ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने कहा कि जीविका की दीदियां आज विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं।
वहीं सूक्ष्म वित्त प्रबंधक सुबीर झा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आगामी निकासी का लक्ष्य ₹215 करोड़ रखा गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रणनीति तय कर दी गई है ताकि समयबद्ध तरीके से स्वयं सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि बैंक और जीविका की संयुक्त पहल से महिलाओं को और अधिक वित्तीय सहयोग मिलेगा।
क्षेत्रीय प्रबंधक मो.रियाजुद्दीन के निर्देशानुसार कार्यशाला के दौरान प्रखंडवार और बैंक शाखा स्तर पर उत्पन्न हो रही बैंकिंग समस्याओं की क्रमबद्ध समीक्षा की गई।
शाखा प्रबंधकों और संबंधित अधिकारियों ने जीविका दीदियों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके समाधान के लिए ठोस सुझाव भी दिए।
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बैंकिंग प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाकर महिलाओं तक समय पर ऋण उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही ऋण निकासी की पारदर्शिता और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।
संचार प्रबंधक राजा सागर ने कहा कि बिहार ग्रामीण बैंक और जीविका दीदियों का संबंध आपसी विश्वास और सहयोग का है।
बैंकिंग सुविधा से जुड़कर दीदियां आत्मनिर्भर बन रही हैं और यह साझेदारी ग्रामीण विकास को गति दे रही है।