निगरानी के डीएसपी पर साईबर के डीएसपी की रहेगी नजर ,दस्तक 7मीडिया की खबर पर पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान। जांच प्रतिवेदन पर रहेगी नजर।
निगरानी के डीएसपी पर साईबर के डीएसपी की रहेगी नजर ,दस्तक 7मीडिया की खबर पर पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान। जांच प्रतिवेदन पर रहेगी नजर।
निगरानी के डीएसपी पर साईबर के डीएसपी की रहेगी नजर ,दस्तक 7मीडिया की खबर पर पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान। जांच प्रतिवेदन पर रहेगी नजर।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
मधुबनी जिला पुलिस की कार्यशैली को लेकर दस्तक 7मीडिया पर लगातार आ रही खबरों का असर अब दिखना शुरू हो गया हें। जयनगर थाना में दर्ज प्राथमिकी (482/22)को लेकर दस्तक 7 मीडिया ने 13अगस्त 25 के दिन विस्तार से खबर लिखी थी। दस्तक 7मीडिया ने स्पष्ट कर दिया था कि जिस तात्कालीन डीएसपी के आदेश पर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उसी डीएसपी ने किस तरह अभियुक्तों को बचाने के लिये अपना प्रतिवेदन दिया था। खबर में यह भी बताया गया था कि इस मामले में दस्तक 7मीडिया के पास जो साक्ष्य उपलब्ध हे वह डीएसपी की कार्यशैली की पोल खोलने के लिये काफी हे और यह साक्ष्य प्रत्यक्ष हे थाना में दर्ज की गई प्राथमिकी ,डीएसपी का पर्यवेक्षण और एसपी का प्रतिवेदन।बस इन तीन कागजों के अवलोकन से ही मधुबनी पुलिस के कार्यशैली का पता चल जाएगा।
अब तों दस्तक 7मीडिया की खबर पर पुलिस मुख्यालय ने भी संज्ञान ले लिया हे। नतीजा यह रहा कि खबर की गंभीरता को देखते हुये मुख्यालय के आदेश पर साईबर थाना पटना के डीएसपी एवं पुलिस निरीक्षक जांच को लेकर दरभंगा भी आये थे।
इसी क्रम में जांचकर्ता डीएसपी राहुल कुमार ने दस्तक 7के इस संवाददाता से भी जयनगर के उक्त मामले में विस्तृत जानकारी ली। प्रथम दृष्टया सूचना पाकर डीएसपी भी हैरान थे। वहीं दूसरी ओर दस्तक की नजर अब जांच प्रतिवेदन पर हे। फिलहाल इतना तों तय हे कि दस्तक द्वारा जारी खबर काफी गंभीर थी और सोलह आने सच भी।सच इसीलिये कि दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद को देखिये।
अब इस प्राथमिकी के पर्यवेक्षण में वैसे शराब माफिया का नाम हटाया गया जो बहुत बड़ा शराब तस्कर था।नेपाल में लाईसेंस लेकर वैध तरीके से काम करता था वहीं बॉर्डर पार करके बिहार में सोफी नामक शराब बेच रहा था ।बिहार का कोई ऐसा कोना नहीं हे जहां इस ब्रांड के शराब को पुलिस ने पकड़ी नहीं हो।इतने बड़े शराब माफिया को अपने पर्यवेक्षण में निर्दोष बता देना पुलिस के कार्यशैली को स्पष्ट इंगित करता हे।
घटना की विस्तृत जानकारी
जयनगर एसडीपीओ ने चार दिसंबर 22को 11.45बजे गुप्त सूचना के आधार पर जयनगर कमला पुल के निकट से दस -ग्यारह मोटरसाइकिल को शराब के साथ खुद पकड़ा था लेकिन उसपर सवार सभी चालक पुलिस को देखते ही फरार हो गया था। एसडीपीओ के निर्देश पर थाना पुलिस ने इस मामले मे (482/22)मामला दर्ज किया। इस मामले मे पुअनि धीरेन्द्र सिंह के ब्यान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। नन्द कुमार गोइत पेसर ना मालूम ,नवीन गोइत एवं सुनील गोइत पिता नन्द कुमार गोइत ,उपेंद्र यादव पे उतिम यादव ,खन्ना मुखिया ,रोशन मुखिया दोनो पेसर गुदड़ी मुखिया तीनों साकिन कोरहिया ,लाल कुमार यादव पेसर राम चंद्र यादव साकिन डोरवार थाना जयनगर को अभियुक्त बनाया गया था इसके अलावे चार पांच अज्ञात थे।जब्ती सूची मे करीब दस ग्यारह मोटरसाइकिल को भी दर्शाया गया था ।
जयनगर से सटे इस शराब व्यापारी का उस वक्त का लाईसेंस देखिये
पर्यवेक्षण में डीएसपी ने क्या लिखा
ऐसे शराब माफिया के बारे में एसडीपीओ ने पर्यवेक्षण में लिखा कि व्यापारिक द्वेष के कारण एवं प्रति स्पर्धा एवं राजनीति के कारण उनके विरोधी द्वारा पिता नन्द किशोर गोइत और उनके दोनों बेटे नवीन गोइत और सुनील गोइत को एक साजिश के तहत कांड मे नाम दे दिया गया हैं ,इन तीनों का खराब चरित्र नहीं हैं और कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं हैं इसीलिये सभी बेगुनाह हैं।यह बात डीएसपी के पर्यवेक्षण टिप्पणी के अवलोकन से साफ साफ पता चलेगा।इसीलिये कहते हे कि जिनपर निगरानी विभाग की कारवाई होनी चाहिये थी वे फिलहाल निगरानी विभाग की शोभा बढ़ा रहें हे।
पुलिस की यह कार्यशैली लगातार जिले के बॉर्डर थाने के इलाकों में हे।इन चार पांच सालों में बॉर्डर इलाकों में जितने भी शराब से जुड़े या फिर sc/st से जुड़े कांडों का सिर्फ वरीय पुलिस पदाधिकारी अवलोकन कर ले तों शायद मधुबनी जिले के पुलिसिया कार्यशैली का परत दर परत खुल जाय।