भदोही के विकासखंड डीघ के ग्राम पंचायत हरीरामपुर के ग्रामीण आज भी पंचायत सचिवालय की मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीणों को दूरदराज के ब्लॉकों और तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। पंचायत भवन न होने से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाइयां होती हैं।

ग्राम पंचायत हरीरामपुर में पंचायत भवन के निर्माण को लेकर अब तक तीन बार अलग-अलग स्थानों पर शिलान्यास किया जा चुका है। लेकिन आज तक कोई भी भवन पूर्ण रूप से तैयार नहीं हो पाया है। सबसे पहले पूर्व ग्राम प्रधान द्वारा भूर्रा गांव में पंचायत भवन की नींव रखी गई। परंतु चुनाव आने के बाद निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।

इसके बाद नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान संजय चौधरी ने पुराने स्थल को निरस्त कर दिया। उन्होंने हरीरामपुर में अपनी निजी जमीन पर पंचायत भवन का निर्माण शुरू करा दिया। दीवारें तो खड़ी हो गईं, लेकिन ग्रामीणों के विरोध और उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते भवन को अधूरा छोड़ना पड़ा। बाद में जिलाधिकारी ने इसे ध्वस्त कर सरकारी भूमि पर निर्माण कराने का आदेश दिया।

तीसरी बार फिर भूर्रा गांव में ही एक दलित की भूमि पर निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन जमीन विवाद के चलते वह भी रुक गया। अब स्थिति यह है कि पंचायत भवन का कोई ठिकाना नहीं है। ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।

क्षेत्र के यजुवेन्द्र सिंह, कल्लन तिवारी, अजय गोस्वामी और भूपेंद्र तिवारी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान संजय चौधरी की लापरवाही से आज तक पंचायत भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित कराते हुए पंचायत भवन को अविलंब पूर्ण करने की मांग की है।