कटिहार के कुरसेला प्रखंड के डुमरिया गांव स्थित प्राचीन विषहरी मंदिर में मंगलवार को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस मौके पर मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया।

नाग पंचमी को लेकर डुमरिया समेत कुरसेला क्षेत्र के अन्य विषहरी स्थानों पर भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। डुमरिया में एक दिवसीय मेलाक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें आसपास के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

हिंदू ही नहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग भी करते हैं पूजा

डुमरिया का विषहरी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द्र का भी प्रतीक है। नाग पंचमी के मौके पर यहां हिंदू समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। पूजा के बाद सभी श्रद्धालु मंदिर परिसर में हाथ उठाकर मन्नतें मांगते हैं।

सांप के विष से बचने की प्राचीन मान्यता

स्थानीय पूजा समिति के अनुसार, इस मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता यह भी है कि अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो वह इस मंदिर में आकर पूजा कर हाथ उठाता है, तो उसका विष स्वतः उतर जाता है। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है और श्रद्धालुओं की आस्था भी बढ़ती जा रही है।

श्रावण मास में नाग देवता की होती है विशेष पूजा

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता को दूध, लावा और फूल अर्पण कर पूजा की जाती है। मान्यता है कि नाग देव की पूजा करने से सर्प भय समाप्त होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस अवसर पर डुमरिया में श्रद्धालुओं ने मंदिर और घरों में नाग देवता की पूजा कर सुख-शांति और सुरक्षा की कामना की। ग्रामीणों के सहयोग से मेला और पूजा का आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा।