बिरौल प्रखंड में ‘दीदी सिलाई प्रशिक्षण केंद्र’ का उद्घाटन।
बिरौल प्रखंड में ‘दीदी सिलाई प्रशिक्षण केंद्र’ का उद्घाटन।
बिरौल प्रखंड में ‘दीदी सिलाई प्रशिक्षण केंद्र’ का उद्घाटन।
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
प्रखंड परिसर में स्थित ‘दीदी अधिकार केंद्र सह पृथ्वी जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति’ के सभागार में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहां जीविका की दीदियों के लिए एक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया, जिसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन बीडीओ प्रदीप कुमार झा, मद्य निषेध थानाध्यक्ष अरुण कुमार और प्रखंड परियोजना प्रबंधक आमोद कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर, सीएलएफ की अध्यक्ष हीरा देवी ने मिथिला की पारंपरिक पाग और चादर भेंट कर बीडीओ प्रदीप कुमार झा का सम्मान किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए बीडीओ प्रदीप कुमार झा ने जीविका दीदियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीविका की दीदियां समाज और सरकार के साथ मिलकर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब जीविका दीदियों द्वारा बनाए गए पोशाक आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलेंगे। इससे बच्चों में समानता की भावना विकसित होगी, क्योंकि पहले पोशाक की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाती थी, जिससे पोशाक समय पर नहीं मिल पाती थी।
मद्य निषेध थानाध्यक्ष अरुण कुमार ने भी जीविका दीदियों को एक सशक्त शक्ति बताया, जो सामाजिक उत्थान के कार्यों में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण पाकर दीदियां स्वरोजगार के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश करेंगी और आर्थिक रूप से भी मजबूत होंगी। प्रखंड परियोजना प्रबंधक आमोद कुमार शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कुल 100 जीविका दीदियों को चार बैचों में सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल, बाल विकास परियोजना के तहत आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए पोशाक बनाने का काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए भी पोशाक बनाने का काम जीविका दीदियों को सौंपा जा सकता है। इस समारोह में इंद्रजीत कुमार, श्याम कुमार, अमित कुमार, नीतीश कुमार, प्रीति कुमारी, तपन कुमार और गुंजन कुमारी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। यह पहल जीविका दीदियों के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।