जिले के सोनबरसा प्रखंड से एईएस के मामले सामने आए हैं। जिसके बाद स्वास्थ विभाग अलर्ट हो गई है। डीएम रिची पांडेय ने मामले पर संज्ञान लेते हुए तत्काल जिले में टास्क फोर्स का गठन कर मानक अनुसार संबंधित पदाधिकारियों को प्रशिक्षण के साथ ही व्यवस्था को बेहतर करने का आदेश दिया है। बता दें कि पिछले साल जिले में कुल 6 मस्तिष्क ज्वर के मरीज मिले थे, जिनमें से 5 मरीज पूरी तरह से ठीक हो गए थे। इस वर्ष एक में पॉजिटिव पाया गया है। सोनबरसा के भुतही गांव निवासी ढाई वर्षीय सूर्य कुमार को चमकी बुखार के लक्षण के साथ एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि बच्चे में एईएस का कारण हाइपोग्लाइसीमिया है।
वहीं, पुपरी प्रखंड के लखनीपुर गांव के 8 वर्षीय निरंजन कुमार को तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत के बाद पुपरी पीएचसी में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर होने पर उसे एसकेएमसीएच रेफर किया गया। हालांकि, जांच में उसमें एईएस के लक्षण नहीं पाए गए। डॉक्टरों के अनुसार, हीटवेव के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी थी। हालांकि इलाज के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
इधर, लगातार बढ़ रही गर्मी और हीटवेव की स्थिति ने जिले में चमकी बुखार का खतरा बढ़ा दिया है। खासकर बच्चों में इसके लक्षण तेजी से सामने आ रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार, उल्टी, बेहोशी की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ^डीएम के निर्देशन में मस्तिष्क ज्वर को लेकर जिला स्तर पर वृहद तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। जिला से लेकर प्रखंड स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके लिए सदर अस्पताल से लेकर प्रखंड स्तरीय सभी अस्पतालों में अलग से वार्ड और दवाओं को व्यवस्था की गई है। – डॉ. रविंद्र यादव, जिला नोडल पदाधिकारी
चमकी के साथ तेज बुखार, सर दर्द, अर्द्ध या पूर्ण में बेहोशी आदि है। इससे बचने के लिए बच्चों को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं यदि संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलाएं। रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं। बेहोसी या चमकी देखते ही आशा दीदी को सूचित करें या उपलब्ध वाहन से स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
^गर्मियों में बच्चों की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। बच्चों को दिन में तीन से चार बार संतुलित आहार देना चाहिए और हर थोड़ी देर में पानी पिलाते रहना चाहिए ताकि वे हाइड्रेटेड रहें। तेज धूप से बचाना जरूरी है, क्योंकि इससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
चमकी बुखार के संदिग्ध मरीजों के लिए एंबुलेंस के साथ मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के वाहनों को टैग किया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. आरके यादव ने बताया की मामला अधिक बिगड़ने पर मरीज को गांव से सीधे सदर अस्पताल आने की व्यवस्था को लेकर विभाग निजी वाहन की भी व्यवस्था करेगा। एंबुलेंस नहीं मिलने पर किसी वाहन से हॉस्पिटल ले जाएं।
