शिवहर के सदर प्रखंड के मथुरापुर कतहरवा पंचायत स्थित बसहिया राम गांव की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। गांव की महिलाओं ने ‘जलपरी जीविका महिला उत्पादक समूह’ के बैनर तले मछली पालन कर हाल ही में मिनी हार्वेस्टिंग की। इससे 127 किलोग्राम मछली बेचकर उन्होंने 26 हजार 550 रुपए की कमाई की।
दीपक कुमार की देखरेख में हुआ विकास
युवा पेशेवर दीपक कुमार ने बताया कि इस समूह में 5 महिलाएं सक्रिय रूप से मछली पालन कर रही हैं। पिछले साल भी इसी तालाब से महिलाओं को एक लाख रुपए से अधिक की आमदनी हुई थी। इस साल की शुरुआत में समूह ने सब्जी की खेती भी शुरू की है। अब बतख पालन की योजना पर काम चल रहा है।
‘घर से निकलकर मिली पहचान’
समूह की सदस्य रूबी देवी ने बताया, ‘पहले घर के कामों तक ही सीमित थीं। पढ़ाई के बावजूद बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। जीविका से जुड़ने के बाद आत्मविश्वास बढ़ा और अब अपनी कमाई से बेटे की बीपीएससी की तैयारी करवा रही हूं।’ रूबी के साथ राजो देवी, सीमा देवी और अन्य सदस्य भी पूरी लगन से इस कार्य में जुटी हैं।
तालाब का हुआ सरकारी आवंटन
जिला परियोजना प्रबंधक गुलाम कौसर ने बताया कि जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत विकसित तालाबों को जीविका समूहों को आवंटित किया जा रहा है। बसहिया राम का तालाब भी जिला पदाधिकारी के माध्यम से इस महिला समूह को दिया गया है। पिपराही प्रखंड में भी महिलाओं द्वारा एकीकृत मत्स्य पालन किया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था से लेकर पर्यावरण तक
यह पहल जहां ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी एक प्रभावशाली कदम है। मत्स्य सखी, कंसल्टेंट और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बना रहे हैं।
