एक साथ भारत एपेक्स पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित 111 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /विधि संवाददाता
दरभंगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार भवन में शुक्रवार को देश के साहित्यिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ। दरभंगा के लाल धनंजय मोदगल्य द्वारा रचित और भारत एपेक्स पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित 111 पुस्तकों का लोकार्पण पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सह दरभंगा न्याय मंडल के निरिक्षी न्यायाधीश अंजनी कुमार शरण और दरभंगा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिनोद कुमार तिवारी ने किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति श्री शरण ने कहा कि मिथिला ज्ञान विज्ञान की धरती रही है,और यह आज भी कायम है इसका साक्षी ये पुस्तकें और इसके लेखक धनंजय हैं।जिला जज श्री तिवारी ने कहा कि लेखक मोदगल्य ने एक सौ ग्यारह पुस्तकों की रचना कर समाज में एक मिशाल पेश किया है।आशा है लोग इससे लाभान्वित होंगे।अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद और महासचिव कृष्ण कुमार मिश्रा ने लेखक मोदगल्य के इस पहल को अभुतपूर्व बताया और हौसला बढ़ाया। लोकार्पित पुस्तकों में विधि शाश्त्र की बारीकियों, वकीलों का कर्तव्य, साहित्य, शिक्षा, आध्यात्म, और आत्मविकास से जुड़े विषयों को समर्पित 111पुस्तकों का अनावरण हुआ।युवा लेखक के इस अनोखी पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान, चेतना और प्रेरणा को जन-जन तक पहुँचाना, सरल भाषा और आधुनिक शैली में। इन पुस्तकों के लेखक ने यह कार्य एक व्यक्तिगत संकल्प और साहित्यिक तपस्या के रूप में किया, जिसे लोकार्पण के बाद अब वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण,प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिनोद कुमार तिवारी, बार एसोसिएशन का अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद, महासच कृष्ण कुमार मिश्रा,प्राधिकार के सचिव रंजनदेव, एसीजेएम करुणानिधि प्रसाद आर्य,मोहिनी कुमारी, वरीय अधिवक्ता अरुण कुमार सिन्हा अमर, बैद्यनाथ झा,जीतेंद्र नारायण झा,चन्द्रधर मल्लिक,पूर्व पीपी विनय कुमार सिंह ,समेत न्यायिक पदाधिकारी, न्यायालय कर्मी,और दर्जनों अधिवक्ता इस सुखद क्षणों के साक्षी बने।

भारत एपेक्स पब्लिशर्स के निदेशक ने बताया कि यह लोकार्पण केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है – विचारों और मूल्यों के पुनर्जागरण का।22 मार्च से पटना गांधी मैदान में आयोजित पुस्तक मेला में यह सभी पुस्तकें उपलब्ध हैं।

इस अवसर पर उपस्थित लेखक मोदगल्य ने कहा, “हर पुस्तक एक बीज है – सोच का, बदलाव का और चेतना का। मेरा उद्देश्य है कि ये विचार समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनें।” संचालन पुस्तक लेखक के पिता अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने किया।बताते चलें कि सभी पुस्तकों की डिजिटल और प्रिंट संस्करण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
