हाउसिंग कालोनी से हरिपट्टी गांव तक बन रहें नाले के घटिया निर्माण को लेकर अब तक कोई भी पदाधिकारी स्थल पर सुधि लेने नहीं पहुंचे हैं इस कारण लोंगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं।
इस नाले के टेंडर की राशि जानने के बाद लोग अचंभित हैं और प्राक्कलन राशि को लेकर सवाल उठा रहें हैं ?सवाल यह हैं कि इस गड़बड़ झाला की जांच आखिरकार कैसे होगी। लोंगों ने कहा हैं कि इस बाबत अब डीएम ,कमिश्नर ,निगरानी विभाग समेत जल संसाधन विभाग के मंत्री एवं मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग करेंगे।लोंगों सवाल यह भी हैं कि जब नाले का निर्माण शुरू किया गया था तो निविदा से संबंधित बोर्ड सड़क पर नहीं लगाया गया। इस कारण स्थानीय लोग समझ नहीं पाये कि टेंडर की राशि कितनी हैं। लोग कहते हैं कि ठेकेदार द्वारा जो काम किया जा रहा था उससे यह बात समझ में आ रहा था कि टेंडर चार पांच करोड़ का हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि ठेकेदार के मुंशी मेनेजर भी यही बात लोंगों को बता रहें थे। लेकिन बीस करोड़ के टेंडर की राशि सुनने के बाद लोंगों में चर्चा का विषय भी हैं और लोग क्रोधित भी हैं। कहते हैं कि निविदा के राशि का बीस प्रतिशत भी काम नहीं हैं। अगर निविदा बीस करोड़ का हैं तो स्टीमेट घोटाला हैं। सरकार इस योजना की जांच कराये। लोग यह भी कह रहें हैं कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से अगर इस तरह की और भी योजना अगर कहीं हो रही हैं तो निश्चित रूप से विभाग के इंजीनियरों द्वारा बड़े पैमाने और घोटाला किया गया हैं और यह घोटाला एस्टीमेट बनाने के दौरान हुई हैं। सरकारी पैसों का लूट खसौट हैं।
इस गहरे राज से आखिर पर्दा उठाएगा कौन ??
इस संबंध में एक ग्रामीण ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि उसे जब पता लगा कि यह योजना करीब बीस करोड़ का हैं तो उसने आरटीआई के तहत बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के कार्यपालक अभियंता से सूचना की मांग की। उस ग्रामीण ने कहा कि दो बार तो मुझे कार्यपालक अभियंता तो कोई सूचना ही नहीं दिया। उसने बताया कि जब अधीक्षण अभियंता से सूचना मांगी तो उन्होंने कार्यपालक अभियंता पर दबाव बनाया। फिर कार्यपालक अभियंता ने करीब दो हजार रुपये जमा कराया। उक्त ग्रामीण ने बताया कि इसके बाद भी जो सूचना मुझे मिली उसमें कई पन्ने सादे थे। उसने कहा कि यही नहीं इसके तुरंत बाद कार्यपालक अभियंता समेत पदाधिकारी बदल दिये गये।
उसने कहा कि मेरे द्वारा यह भी पूछा गया था कि महज चार किलोमीटर नाले के निर्माण का टेंडर करीब बीस करोड़ की राशि का कैसे हो गया। जिसका जवाब आज तक नहीं मिला।