मंत्री एवं मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग करेंगे।लोंगों सवाल यह भी हैं कि जब नाले का निर्माण शुरू किया गया था तो निविदा से संबंधित बोर्ड सड़क पर नहीं लगाया गया। इस कारण स्थानीय लोग समझ नहीं पाये कि टेंडर की राशि कितनी हैं। लोग कहते हैं कि ठेकेदार द्वारा जो काम किया जा रहा था उससे यह बात समझ में आ रहा था कि टेंडर चार पांच करोड़ का हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि ठेकेदार के मुंशी मेनेजर भी यही बात लोंगों को बता रहें थे। लेकिन बीस करोड़ के टेंडर की राशि सुनने के बाद लोंगों में चर्चा का विषय भी हैं और लोग क्रोधित भी हैं। कहते हैं कि निविदा के राशि का बीस प्रतिशत भी काम नहीं हैं। अगर निविदा बीस करोड़ का हैं तो स्टीमेट घोटाला हैं। सरकार इस योजना की जांच कराये। लोग यह भी कह रहें हैं कि बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से अगर इस तरह की और भी योजना अगर कहीं हो रही हैं तो निश्चित रूप से विभाग के इंजीनियरों द्वारा बड़े पैमाने और घोटाला किया गया हैं और यह घोटाला एस्टीमेट बनाने के दौरान हुई हैं। सरकारी पैसों का लूट खसौट हैं।