हाउसिंग कॉलोनी से हरिपट्टी गांव तक बन रहें नालों के घटिया निर्माण को लेकर चर्चा गरम हैं ?लोग कह रहें हैं कि यह नाला बन रहा हैं या सरकारी पैसों का लूट खसोट हैं। नाले का टेंडर होने के बाद लोंगों में खुशी का माहोल था, सकूंन मिला था कि अब नाला बनने से कई मुहल्लों का पानी नाले में चला जाएगा और बह जाएगा और जल जमाव से लोंगों को मुक्ति मिल जाएगी ,लेकिन यह सोच के ठीक विपरीत हो गया ।

यही लोग अब सवाल कर रहें हैं कि नाला तो बन रहा हैं लेकिन खानापूर्ति हो रही हैं। जिस नाले की उम्र  दस -बीस साल होनी चाहिये , वह नाला कुछ ही दिनों में टूटकर बिखर जाएगा। लोग यह भी कह रहें कि इस विभाग के मंत्री महोदय के बेहतर सोच के कारण नाला का टेंडर हुआ लेकिन ठेकेदार के घटिया निर्माण कार्य ने सभी पर पानी फेर दिया हैं।
अब लोग इस घटिया काम को लेकर ठेकेदार के विरुद्ध जांच कई मांग कर रहें हैं। स्थानीय कई लोग तो यह भी कह रहें हैं कि इस काम का टेंडर जिस ठेकेदार द्वारा लिया गया हैं और जिस तरह से कार्य किया जा रहा हैं वह बहूत ही घटिया हैं। लोग कहते हैं जो ठेकेदार इस योजना में कार्य कर रहें हैं इस तरह के कार्य में  निविदा की राशि तीन से चार करोड़ तक अधिकतम होनी चाहिये , जब्कि इस टेंडर के बारे में चर्चा हैं कि तकरीबन उन्नीस करोड़ से ज्यादा की निविदा राशि हैं। लोग यह भी कह रहें हैं कि अगर इस निविदा की राशि उन्नीस -बीस करोड़ हैं फिर इस राशि के अनुरूप 20प्रतिशत भी निर्माण कार्य स्थल पर काम नहीं हो रहा हैं।

नाले की सतह पर घटिया ईट एक आध इंच की ढलाई को देख लोंगों ने सवाल शुरू कर दिया हैं कि इस घटिया निर्माण की उम्र क्या हो सकती हैं। उन्नीस बीस करोड़ के टेंडर में सबसे पतला छड़ और ढलाई एक दो इंच आश्चर्य हैं ? सिनुआर ,डरहार ,हरिपट्टी के कई लोंगों का भी यही आरोप हैं। यहां के कई लोग मंत्री जी का जितना बड़ाई कर रहें हैं उतना ही आक्रोश ठेकेदार पर हैं। लोग कहते हैं कि मंत्री जी के कृपा से इस नाले का पक्कीकरण हुआ लेकिन ठेकेदार ने घटिया निर्माण कर इस नहर को बर्बाद कर दिया। लोगो का कहना हैं कि नहर के सतह और दोनों और जो ईट लगाये गये हैं वह घटिया ईट हैं। सतह जो बनाए गये हैं वह भी घटिया ईट से बनाया गया हैं। लोग कहते हैं कई जगहों पर बस दो तीन इंच की ढलाई हैं ,कहीं कहीं चार पांच इंच ढलाई किया गया हैं और जहां मोटी परत की ढलाई हैं वहां चिन्हित कर जेई से नापी लेकर बिल विपत्र बना दिया हैं।

लोंगों की यह भी शिकायत हैं कि एक आध दिन छोड़कर विभाग के जेई ,एसडीओ या कार्यपालक अभियंता जांच करने निर्माण स्थल तक नहीं आये इस कारण घटिया काम होता रहा। लोंगों का यह भी आरोप हैं कि जो कार्य का स्वरूप हैं वह यह साबित करता हैं कि महज चार किलोमीटर के इस नाला निर्माण का टेंडर उन्नीस -बीस करोड़ का केसे हो सकता हैं ?यह निर्माण कार्य 4-5करोड़ में अधिकतम होना चाहिये। लोंगों ने कहा कि काम होने तक चट्टी से हरिपट्टी तक ठेकेदार द्वारा निविदा से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगाया गया ताकि कोई भी लोग निविदा की राशि नहीं समझ पाये ?लोंगों को शक हैं कि चार पांच करोड़ में संपन्न होने वाले इस नाले का टेंडर उन्नीस बीस करोड़ का कैसे हो गया ?कहीं स्टीमेट घोटाला तो नहीं हैं ?ठेकेदार और इंजीनियरों की सांठ गांठ में इतने बड़े राशि का स्टीमेट तो नहीं बनाया गया ?स्थानीय लोंग अब इस पूरे योजना पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं। लोग कहते हैं कि इस योजना की जांच निगरानी विभाग की से करायी जाय ताकि दूध का दूध पानी का पानी निकल सके। लोंगों की मांग हैं कि इस योजना के बिल -विपत्र के भुगतान को रोककर निगरानी विभाग से जांच के बाद संवेदक का भुगतान किया जाय। चार किलोमीटर की इतनी ढलाई में या कार्य कराने में निविदा की राशि क्या होनी चाहिये यह भी सार्वजनिक हो और जांचों उपरांत संबंधित सारे अधिकारियों पर भी कारवाई हो ?

जिलाधिकारी आवास से महज सटे कुछ ही दूरी पर चल रहें कार्यों को लेकर कई लोंगों ने यह जानकारी दी कि नाले का घटिया निर्माण कार्य हो रहा हैं जो डीएम के आवास के महज कुछ दूरी पर चल रहा हैं ।स्थानीय लोंगों ने कहा कि काम के नाम पर खाना पूर्ती की जा रही हैं। लोग यह भी कह रहें थे कि इतने दिनों से काम चल रहा हैं कोई भी इंजीनियर देखने नहीं आते। शुरुआती दौर में इंजीनियर आये थे जब खुदाई का काम चल रहा था।


बता दें कि यह कार्य बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दरभंगा के अधीन कार्य हैं।
अब लोंगों की मांग उठने लगी हैं कि इस नाले की गुणवत्ता की जांच हो साथ ही साथ यह जांच हो कि जिस तरह नाले का निर्माण हुआ हैं वह कितने करोड़ के राशि तक का होना चाहिये।यह एस्टीमेट घोटाला हैं क्यूंकि तकरीबन चार पांच किलोमीटर में बनने वाले इस नाले का निविदा राशि केसे उन्नीस बीस करोड़ हो सकता  हैं ?लोग कहते हैं कि बड़ी धांधली ठेकेदार द्वारा की जा रही हैं और इसकी सुधि लेने वाला कोई भी प्रशासनिक पदाधिकारी नहीं हैं।इस बाबत कार्यपालक अभियंता को फोन कर इस बाबत जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने बताया कि मीटिंग में हैं।