आदेश मिलते ही सिविल सर्जन के द्वारा जांच कमेटी बनाने की प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि अब तक जांच कमेटी नहीं बनी है लेकिन उससे पहले ही शनिवार को सिविल सर्जन एसके चौधरी ने पत्र जारी कर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश कुमार को तत्काल प्रभाव से सदर अस्पताल के उपाधीक्षक पद से पदमुक्त करते हुए डॉ. नागमणि को सदर अस्पताल का नया उपाधीक्षक बनाया है।
हालांकि यह बात किसी से छिपी नहीं है की सदर अस्पताल बिचौलिये का अड्डा बना हुआ है। वहीं सदर अस्पताल के अधिकतर डॉक्टर रोस्टर से ड्युटी नहीं करते हैं। जिले के सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक व अब नये बने उपाधीक्षक समेत आधे से अधिक डॉक्टर अपने निजी क्लिनिक चलाने में ही व्यस्त रहते हैं। सदर अस्पताल की कुव्यवस्था आए दिन देखने को मिल जाती है। हालांकि पूर्व उपाधीक्षक डॉ. गिरीश के कार्यकाल में कई बेहतर कार्य भी सदर अस्पताल में हुए है। यहां यह भी बता दें कि सांसद शांभवी के निरीक्षण की सूचना पाकर वहां मौजूद रहने वाले डॉक्टर भी आनन-फानन में ही पहुंचे थे। वह लोग भी अस्पताल से गायब थे और सूचना मिलने पर अपने निजी क्लिनिक को छोड़ दौड़े-दौड़े अस्पताल पहुंचे। उपाधीक्षक डॉ. गिरीश भी देर से पहुंचे।
