सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हैं बहादुरपुर के थानाध्यक्ष ?पीड़ितों के आवेदन पर नहीं दर्ज की जाती हैं प्राथमिकी ?कई ऐसे मामले हैं जो इनके पुलिसिया कार्यशैली पर उठा रहें हैं सवाल ? 

दरभंगा /संजय कुमार राय 

बहादुरपुर प्रखंड स्थित मनरेगा कार्यालय में बुधवार को अजीबो -गरीब घटना हुई। एक मुखिया के पति ने रोजगार सेवक के साथ मारपीट की और अपने समर्थकों के साथ काफी शोर शराबा किया।इस दौरान सेंकड़ों लोंगों की भीड़ जमा हो गई लेकिन इस मामले को लेकर जब रोजगार सेवक बहादुरपुर थाना में शिकायत दर्ज कराने गया तो थाना की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया।अब सवाल यही हैं कि आखिर न्याय मांगने लोग कहां जाय ?यही नहीं दो महीना से एक पीड़ित शिक्षक अपने पांच लाख रुपये धोखाधड़ी को लेकर बहादुरपुर थाने गया था लेकिन बहादुरपुर थाना की पुलिस आज तक पीड़ित शिक्षक के आवेदन पर कोई कारवाई नहीं की, ना ही जांच किया और ना ही प्राथमिकी दर्ज की। अगर आम लोंगों की शिकायत का निवारण थाना पुलिस नहीं करेगी तो ऐसे थाना का क्या काम ?रोजगार सेवक को सरे आम उसके कार्यालय में पीट दिया गया इसके सेंकड़ों प्रत्यक्षदर्शी हैं फिर रोजगार सेवक के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं किया जाना कहां तक उचित हैं ?

सरकार कहती हैं कि थाना पर आयें पीड़ितों को थाना पुलिस बैठाए ,उसे पानी पिलाये फिर उसकी शिकायत सुने और अच्छे व्यवहार दिखाए ?पर यहां तो अंग्रेजों वाली हुकूमत दिखाई पड़ती हैं।

रोजगार सेवक ने राज कुमार सिंह ने थाने में जो लिखित आवेदन दिया उस आवेदन में आरोप लगाया है कि ओझौल पंचायत के बलुआही गांव में रामकुमार सिंह के खेत से भीम सिंह के खेत तक बांध में मिटटी करण का काम किया जा रहा है। जिसका योजना कोड एफपी/ 20319650 हैं और प्राकलित राशि चार लाख 80 हजार 788 रुपये है। इस योजना की तकनीकी स्वीकृति 14 फरवरी 2023 को वही प्रशासनिक स्वीकृति 13 मार्च 2022 को हुई । इसके बाद इस योजना पर काम प्रारंभ किया गया।पंचायत के बलुआही गांव में संजय सिंह के गढ्ढा से खोरा पुलिया तक मिटटीकरण का कार्य शुरू हुआ जिसकी प्राकलित राशि
4लाख45हजार181 रुपये है। रोजगार सेवक ने आरोप लगाया कि लेबर मेट के द्वारा दोनों योजनाओं को मिलाकर 108 मजदूर का अटेंडेंस मुखिया पति द्वारा जबरन बनाया जा रहा था,जबकि वास्तव में मात्र 35 मजदूर ही काम कर रहा था । मुखिया पति सूरज कुमार द्वारा जबरदस्ती उपस्थिति पंजी पर दस्तखत करवाया जा रहा था। जिसका विरोध रोजगार सेवक ने किया इसी कारण मुखिया पति सूरज ने उनके साथ मारपीट की।
इधर मुखिया पति सूरज ने कहा कि रोजगार सेवक के साथ कोई मारपीट नहीं की गई। जितना मजदूर के द्वारा योजना पर काम करवाया जा रहा था, उतना ही मजदूर की उपस्थित पर हस्ताक्षर करने के लिए रोजगार सेवक को कहा गया इसी पर विवाद हो गया।
अब थानाध्यक्ष सुनील कुमार का इस मामले में अलग ही आलाप हैं ,इनका कहना हैं कि रोजगार सेवक को अपने वरीय पदाधिकारियो से आवेदन अग्रसारित करवा कर थाना में देना पड़ेगा इसके बाद ही प्राथमिकी दर्ज होगी और विधिवत कारवाई की जाएगी।
अब सवाल यही हैं कि सेंकड़ों लोंगों के बीच मार खाये रोजगार सेवक के आवेदन पर प्राथमिकी नहीं दर्ज करना कहां तक उचित हैं ?किस न्याय संहिता के किताब में यह कानून बना हैं कि किसी कर्मी के मारपीट होने पर उसके वरीय पदाधिकारी द्वारा जब उसके आवेदन को अग्रसारित किया जाएगा तब प्राथमिकी दर्ज होगी ?सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश हैं कि थाना में आयें शिकायतकर्ता के आवेदन पर तुरंत एफआईआर दर्ज करना हैं  ,यह अनुसंधान का विषय होगा कि दोषी कौन हैं या निर्दोष कौन हैं ?हाँ थानाध्यक्ष इस मामले को लोकपाल को अग्रसारित कर सकते हैं ,लोकपाल इसकी जांच कर सच्चाई सामने लाएगी और दोषियों पर कारवाई करेगी ,क्युकि मामला मनरेगा से जुड़ा हैं लेकिन किसी के आवेदन को थानाध्यक्ष नकार देंगे ,यह न्यायोचित नहीं हैं ?