दरभंगा जिला के बिरौल अनुमंडल क्षेत्र के नगर एवं विभिन्न पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर की जा रही है कागजी खानापूर्ति,ऐसे में मनुष्य को मानसिक शांति और सकारात्मकता का माहौल में रखने की बात कहना बेईमानी होगी।

उत्तम सेनगुप्ता/दरभंगा

भारत सरकार की ओर से पुरे देश में स्चच्छता के तहत साफ सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है। इसको लेकर सार्वजनिक जगहों, विद्यालय सहित अन्य जगहों पर विभिन्न संगठनों के माध्यम से साफ सफाई अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन दरभंगा जिला के बिरौल अनुमंडल क्षेत्र के नगर एवं विभिन्न पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जा रही है। जिसका प्रमाण खबर के साथ छपी फोटो अपने आप में बंया कर रही है।कहा जाता है कि स्वच्छता बीमारी फैलने से रोकती है और मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करती है।इसके अलावा साफ सफाई वातावरण में रहने से मनुष्य को मानसिक शांति और सकारात्मकता का माहौल बनता है। परंतु सरकार की ओर से किये जा रहे साफ सफाई कार्य एक मात्र देखवा ही है। दस्तक-7 अपने खबर के माध्यम से स्चच्छता की ऐसी व्यवस्था जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ाई के लिए विद्यालय आते हैं। लेकिन उसी परिसर से सटे कचरा का अंबार तथा उससे निकल रहे दुर्गंध विद्यालय के बच्चों के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने का काम कर रही है। जिसे देखने का समय न तो प्रशासन के अधिकारी को है और न ही पंचायत के जनप्रतिनिधियों को है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अफजाला को नगर पंचायत बिरौल का दर्जा प्राप्त होने के बाद लोगों को यह उम्मीद जगी थी कि विद्यालय के निकट वर्षों से जमा कचरा का अंबार सदा के लिए हटा दिया जायेगा।लेकिन लोगों की यह उम्मीद उम्मीद बन कर रह गई। इतना ही नहीं इसके अलावा अन्य जगहों पर भी इस तरह का नजारा देखने को मिलेगा। इस संबंध में नगर पंचायत बिरौल के सफाई पर्यवेक्षक आयुष्मान मिश्रा से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि अब मै आईटी कर्मी के पद पर कार्यरत हुं। इसे देखने की जिम्मेवारी अन्य कर्मचारी का है। यहांं बतादें कि यह गंदगी विगत दो वर्षों से अधिक समय से मध्य विद्यालय अफजला खेबा के निकट पसरा हुआ है। उस समय आयुष्मान मिश्रा सफाई पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत थे। लेकिन उन्होंने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। और सिर्फ नाले की सफाई पर ही सिमट कर रह गए। कार्यपालक पदाधिकारी से कार्यालय में संपर्क करने पर बताया गया है अधिकारी क्षेत्र में हैं।
स्चच्छता के ऐसी व्यवस्था में पढ़ाई करने वाले बच्चों की मानसिक शांति और विद्यालय में सकारात्मकता का महौल कहना बेईमानी होगी। प्रधानाध्यापक नित्यानंद ने बताया कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे इसी समाज के है। गंदगी फैलाने वाले और सफाई कर्मी को खुद विचार होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले कई बार मौखिक शिकायत कर चुका हूं। बावजूद स्थिति ज्यों का त्यों बना हुआ है।