साईबर अपराधियों ने ठगी के तरीकों मे और भी तरीका खोजा ,थाना मे दिये आवेदनकर्ता से करते हैं पैसों की मांग ?

दरभंगा/क्राइम रिपोर्टर 

आम लोंगों को निशाना बनाने के लिये साइबर अपराधी  तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।ठगी के कई तरीकों को यें अपराधी ईजाद करते हैं और ठगी का प्रयास करते हैं।अब नये तरीकों मे जब कोई महिला थाना मे फरियाद लगाने आती हैं तो स्वाभाविक हैं कि फरियादी का नाम पता लिखा रहता हैं ।अब ऐसे फरियादी को पुलिस बनकर ठग  फोन करते हैं और उससे पैसों की मांग की  जाती हैं।

जिसका शिकार आम नागरिक और थानों में फरियाद लगाने वाले हो रहे हैं। लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बेलवागंज की रहने वाली माला देवी ने महिला थाना में पति सहित ससुराल वालों पर मारपीट कर घर से निकाल देने के मामले को लेकर मामला दर्ज करवाई है। महिला थाना की पुलिस नियमानुसार अपना कार्य कर रही है। इस बीच कई दिनों से मोबाइल नंबर 9752490319 से साइबर अपराधी द्वारा कॉल कर फरियादी से रुपए की मांग की जा रही है। फरियादी ने बताया कि वह बहुत हीं गरीब है खाने को पैसा नही है तो कहां से पैसा देंगे । जिस मोबाइल नंबर से वह कॉल कर रहा है बताता है कि मैं तुम्हारे केस का अनुसंधानक हूं। यदि पैसा दोगे तो जल्द हीं तुम्हारे पति सहित ससुराल वाले को गिरफ्तार कर लेंगे। यदि रुपया नहीं दोगी तो किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी और केस रफा दफा कर देंगे। पैसा देने में असमर्थता जताने पर गंदी-गंदी गालियां देने लगता हैं। जब वह महिला अपनी मोबाइल पर ठग को मां से बात करने के लिये  बोली तो उसकी मां को भी गंदी-गंदी गालियां देने लगा। रुपया  नहीं देने पर केस को खत्म कर देने सहित गंदी-गंदी गालियां दे रहा है। साइबर अपराधी के द्वारा फरियादियों को मोबाइल के नंबर पर पैसा भेजने को बोलता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साइबर अपराधी ऑनलाइन आवेदन को डाउनलोड कर आवेदन में लिखें मोबाइल नंबर पर कॉल कर पैसे की मांग करते हैं। इधर लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बंगाली टोला के रहने वाले आलोक नाथ झा के मोबाइल पर साइबर अपराधियों ने कॉल कर उनके पुत्र को आपराधिक मामले में गिरफ्तार होने की बात कह 49 हजार रुपए ठग लेने का मामला प्रकाश मे आया। पुत्र मोह में उन्होंने बिना सोचे समझे साइबर अपराधी के खाते में 49 हजार रुपया भेज दिया। मामले को लेकर उनके छोटे भाई नीरज कुमार पाठक ने लहेरियासराय थाना में मामला दर्ज करवाया है। साइबर अपराधी को मोबाइल नंबर के धारक और उनके पुत्र का नाम ,घर का पता सब मालूम रहता है। इस वजह से लोग झांसे मे आ जाते हैं। आखिर साइबर अपराधी को परिवार के सदस्यों का नाम की जानकारी कहां से होती है। पुलिस को इसकी भी जांच पड़ताल करनी चाहिए।