दरभंगा। व्यवहार न्यायालय, दरभंगा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने दरभंगा राज परिवार के कपिलेश्वर सिंह के द्वारा दर्ज कराये गये ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय थाना कांड संख्या-34/24 के अभियुक्त उदयनाथ झा उर्फ विष्णु और केदारनाथ मिश्र की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के पश्चात जमानत याचिका खारिज कर दी। कामेश्वर रिलिजियस ट्रस्ट के अधीन 108 मंदिरों के देवी-देवताओं के बहुमूल्य जेवर-जेवरात महाराजा कामेश्वर सिंह ने एक बॉल्ट में रखकर भारतीय स्टेट बैंक, दरभंगा शाखा में रखवा दिया था। बैंक में रखे गये उक्त बॉल्ट वर्षों से नहीं खोला गया था। प्राथमिकी में आरोप है कि महारानी कामसुन्दरी के एटॉर्नी उदयनाथ झा उर्फ विष्णु और ट्रस्ट के प्रबंधक केदारनाथ मिश्र एवं अन्य के द्वारा साजिश कर उक्त बॉल्ट में रखे गए बहुमूल्य जवरातों को निकाल कर बेच देने का कार्य किया गया है। इसी मामले में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका संख्या- 270/24 में सोमवार को बचाव और अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई हुई। लोक अभियोजक नसीरउद्दीन हैदर ने जमानत याचिका का विरोध किया और कोर्ट ने सुनवाई पश्चात अभियुक्त द्वय की जमानत याचिका खारिज कर दी। बताते चलें कि भारत के संविधान पर दरभंगा के कामेश्वर सिंह का हस्ताक्षर है। वे संविधान सभा के सदस्य थे। वे राज्य सभा के सदस्य थे। दरभंगा हवाई अड्डे का निर्माण कराये थे। उनके हवाई अड्डे पर 6 विमान भी थे।