दरभंगा में पुलिस नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ : थानों की सरकारी गाड़ियाँ प्राइवेट ड्राइवरों के हाथ,भैया भेल ड्राइवर अब डर कहे का”चर्चा तेज सुरक्षा पर बड़ा खतरा, थानेदारों ने प्राइवेट ड्राइवरों को थमा दी सरकारी चाभी,
दरभंगा में पुलिस नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ : थानों की सरकारी गाड़ियाँ प्राइवेट ड्राइवरों के हाथ,भैया भेल ड्राइवर अब डर कहे का”चर्चा तेज सुरक्षा पर बड़ा खतरा,
थानेदारों ने प्राइवेट ड्राइवरों को थमा दी सरकारी चाभी,
दस्तक 7 मीडिया दरभंगा :गुड्डू राज
जिले में इन दिनों एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा तेजी से चर्चा में है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ शराब कारोबारियों और गलत गतिविधियों में शामिल कुछ लोगों के बीच भी यह बात फैल रही है—
“भैया भेल ड्राइवर अब डर कहे का!”यह चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि जिले के कई थानों में नियमों को नजरअंदाज करते हुए स्थानीय प्राइवेट ड्राइवरों से थाना की सरकारी गाड़ियाँ चलवाई जा रही हैं। यह स्थिति न सिर्फ नियमों के खिलाफ है,बल्कि सुरक्षा और गोपनीयता दोनों के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही है।
नियम क्या कहते हैं और हो क्या रहा है?
पुलिस विभाग के नियम साफ बताते हैं कि थाना की सरकारी गाड़ी वही व्यक्ति चलाएगा जो विभाग द्वारा नियुक्त हो,जिसका पूरा चरित्र सत्यापन (वेरिफिकेशन) हुआ हो,
और जिसे पुलिस द्वारा अधिकृत किया गया हो।लेकिन जिले के कई थानों में थानेदार स्थानीय प्राइवेट ड्राइवरों से ही गाड़ी चलवा रहे हैं,जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि कोई स्थानीय निजी ड्राइवर थाना की गाड़ी चला सकता है।
प्राइवेट ड्राइवरों के मकसद पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये निजी ड्राइवर थाना की गाड़ी चलाने के पीछे किस उद्देश्य से जुड़े हैं। जब कोई प्राइवेट ड्राइवर पुलिस गाड़ी चलाता है,तो उसे पुलिस की योजनाओं,छापेमारी,गंतव्य,और कार्रवाई की जानकारी पहले से मिल जाती है। यदि वह जानकारी गलत हाथों में चली जाए,तो कार्रवाई विफल भी हो सकती है। इस स्थिति को देखकर लोग स्वाभाविक रूप से कह रहे हैं—“पुलिस विभाग खुद समझ सकता है कि भैया भेल ड्राइवर अब डर कहे का लोग कह रहे है…”थाने की बदनामी का खतरा बढ़ रहा है,स्थानीय लोग कह रहे हैं कि इस वजह से थानों की छवि खराब हो सकती है।इसके पीछे कारण ये हैं—
लोग थाने के बजाय पहले प्राइवेट ड्राइवर को सूचना कर देते हैं। कुछ शराब कारोबारी और गलत गतिविधियों में शामिल लोग सीधे ड्राइवर से संपर्क करके अपनी बात बताने लगते हैं।
कुछ लोग यह रास्ता ढूंढते हैं कि किस मामले में कैसे बचा जा सकता है। जब थाने तक सूचना पहुँचने से पहले ही प्राइवेट ड्राइवरों के पास जानकारी पहुँच जाए,तो यह किसी भी पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
पुलिस को अपने ही नियम याद रखने की जरूरत
पुलिस विभाग में एक सख्त नियम है कि किसी पुलिसकर्मी को उसके स्थानीय क्षेत्र में ड्यूटी नहीं दी जाती,ताकि वह स्थानीय दबाव में न आए। लेकिन यहाँ उल्टा हो रहा है—थाने में स्थानीय निजी ड्राइवरों को ही गाड़ी चलाने दे दिया गया है,जबकि यह नियमों के बिल्कुल विपरीत है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि इस मुद्दे की सही तरीके से जांच की जाए तो कई बातें सामने आ सकती हैं—कौन-कौन से थाने में प्राइवेट ड्राइवर इस्तेमाल हो रहे हैं,किन-किन मामलों की जानकारी पहले ही बाहर जा रही है,किन-किन लोगों का ड्राइवरों से सीधा संपर्क है,और यह व्यवस्था कैसे शुरू हुई,लोगों के अनुसार,इस मामले पर पुलिस को तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। दरभंगा जिले में थानों की सरकारी गाड़ियाँ स्थानीय प्राइवेट ड्राइवरों से चलवाने का मामला गंभीर होता जा रहा है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है,बल्कि—थाने की छवि,पुलिस की कार्रवाई,और सुरक्षा व्यवस्था—तीनों को कमजोर कर सकता है।“भैया भेल ड्राइवर अब डर कहे का” जैसी चर्चाएँ यूँ ही नहीं फैलतीं।यह संकेत है कि लोग भी हालात को समझ रहे हैं और चिंतित हैं।जरूरत है कि पुलिस विभाग इस मामले की जांच करे,नियम लागू करे,और थानों को ऐसी लापरवाही से बचाए।